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आंखों-देखी: 5 मिनट में केदारनाथ तबाह

Sat, 22 Jun 2013 10:00 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 22 Jun 2013 10:00 PM IST
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Kedarnath temple's priest on the moment disaster struck

केदारनाथ में 17 जून की सुबह लगभग सवा आठ बजे मंदिर से कुछ किमी दूर पानी, कीचड़ और पत्थरों का एक विशालकाय गोला उठा था, जिसने पांच मिनट के भीतर पूरे तीर्थ क्षेत्र में विनाश का मंजर रच दिया।

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इस घटना के साक्षी और केदारनाथ मंदिर के पुजारी दिनेश बगवाडी ने भाजपा उपाध्यक्ष उमा भारती के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उन्हें आपबीती सुनाई।
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इस जलप्रलय में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खो चुके पंडित बगवाडी को खुद अपने जीवित बच जाने पर यकीन नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि बारिश 15 जून से ही हो रही थी, लेकिन 16 तारीख को बहुत ज्यादा बरसात हुई। रात आठ-साढे़ आठ बजे केदारनाथ में मंदाकिनी पर बने दोनों पुल टूट गए।
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17 तारीख को सुबह पांच बजे पता चला कि भारतसेवा आश्रम ध्वस्त हो गया, लेकिन मंदिर में पूजा और दर्शन का सिलसिला चलता रहा।

पंडित बगवाडी बताते हैं कि सुबह करीब सवा आठ बजे केदारनाथ मंदिर के पीछे मंदाकिनी के उद्गम के पास से एक विशाल काला गोला उभरा।

कीचड़, मिट्टी और पत्थरों से मिला पानी अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ा और जब तक लोग कुछ समझ पाते इस काले गोले ने पूरे इलाके को आगोश में ले लिया।

पंडित बगवाडी मंदिर के अंदर घुसने में कामयाब रहे। उन्होंने देखा कि जबरदस्त जलप्रवाह मंदिर के अंदर आया और मलबे में आए पत्थरों के प्रहार और तेज गति से पानी भर जाने से अनेक लोगों की मौत हो गई।

जलप्रवाह निकल जाने के बाद जब पंडित बगवाडी बाहर निकले तो सहसा वह पहचान ही नहीं सके कि यह वही केदारनाथ है जिसे वह कुछ पल पहले छोड़ कर मंदिर के अंदर गए थे।


चारों तरफ मौत और विनाश का मंजर था। उन्होंने बताया कि उन्हें 18 तारीख को सहायता मिली और वह शाम चार बजे हेलीकॉप्टर की मदद से फाटा पहुंचे।

उन्होंने बताया कि केदारनाथ में उस दिन लोगों का सबसे ज्यादा जमावड़ा गरड चट्टा, घोड़ा पड़ाव, भैरव शिला और मंदिर के पीछे था।

मंदिर में करीब आठ सौ लोग थे, जबकि पूरे केदारनाथ में पांच हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। उनका अनुमान है कि इस घटना में सिर्फ केदारनाथ में ही लगभग तीन हजार लोग मारे गए हैं।

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