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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Joke with topper

टॉपर के साथ किया भद्दा मजाक

Fri, 30 Aug 2013 08:33 AM IST
अमर उजाला, डा. मुकेश नैथानी, घनसाली (टिहरी)
अमर उजाला, डा. मुकेश नैथानी, घनसाली (टिहरी) Updated Fri, 30 Aug 2013 08:33 AM IST
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Joke with topper

हाईस्कूल परीक्षा 2012-13 में बालिका वर्ग में उत्तराखंड में अव्वल आने वाली छात्रा के साथ कापी जांचने वाले ने भद्दा मजाक किया। छात्रा अंबिका चौहान को दो सवालों के जवाब सही होने के बावजूद परीक्षक ने शून्य अंक दिए हैं।

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अन्य सवाल भी ठीक ढंग से नहीं जांचे गए हैं। अगर अंबिका को पूरे अंक मिलते तो उसकी रैंक और बेहतर हो सकती थी। यह खुलासा हुआ अंबिका के पिता द्वारा सूचना के अधिकार के तहत किए गए आवेदन के उत्तर में मिली जानकारी में।
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हैरत की बात यह है कि इस खुलासे के बाद भी शिक्षा महकमा त्रुटि सुधार के बजाय इस तरह की कोई व्यवस्था न होने की दुहाई दे रहा है। अब छात्रा के पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
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सरस्वती विद्या मंदिर घनसाली की अंबिका चौहान ने इस वर्ष उत्तराखंड हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा में प्रदेश की बालिका वर्ग में प्रथम स्थान के साथ ही बालक-बालिका वर्ग में छठा स्थान हासिल किया था।

शिक्षक ने पूरे अंक नहीं दिए
अंबिका को 500 में से 469 अंक (93.8 प्रतिशत) मिले थे। लेकिन गणित विषय में सभी प्रश्न सही करने के बाद भी मूल्यांकन करने वाले शिक्षक ने पूरे अंक नहीं दिए। प्रश्न संख्या 18 तथा 20 (तीन-तीन अंक) के सही हल करने के बाद भी शून्य अंक दिया गया है।

अन्य प्रश्नों का भी सही मूल्यांकन नहीं किया गया है। पिता का दावा है कि अगर सही ढंग से कापी जांची जाती तो उसका प्रदेश में प्रथम स्थान होता।

अंबिका के पिता रघुवीर सिंह चौहान ने सूचना अधिकार के तहत बोर्ड से सूचना मांगी तो विभाग की पोल खुल गई। लेकिन विद्यालयी शिक्षा सचिव ने लिखा है कि बोर्ड में उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था नहीं है। अगर परीक्षक द्वारा दिए गए अंक जोड़ने में छूटे हैं तो तो वही जोड़े जा सकते हैं।

गणित में अंबिका के 95 फीसदी अंक आने की उम्मीद थी। लेकिन उसे सिर्फ 86 अंक मिले। सूचना के अधिकार से सच्चाई सामने आ गई। प्रश्न संख्या 18 व 20 के सही उत्तर लिखने के बाद भी उसे शून्य अंक दिए गए हैं। बेटी को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय की शरण में जाऊंगा।

-रघुवीर सिंह चौहान अंबिका के पिता

मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं आया है। किस स्तर पर यह चूक हुई है अधिकारियों से पता कराऊंगा। यदि उत्तर पुस्तिका जांचने में कोई गड़बड़ी हुई होगी तो पुनर्मूल्यांकन कर छात्रा को अवश्य न्याय दिलाया जाएगा।
-मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री

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