उत्तराखंडः आग बुझाने में मदद नहीं की तो हो सकती है जेल
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जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए सेना, एनडीआरएफ के बाद अब वायु सेना को भी लगा दिया गया है, वहीं वन और राजस्व विभाग के कर्मचारी पहले से आग बुझाने में जुटे हैं, लेकिन आम नागरिकों का भी कर्तव्य है कि इसमें हाथ बटाएं।
कानून के जानकारों की मानें तो आग बुझाने में सहयोग न करने पर छह महीने तक की जेल हो सकती है। आग बुझाने में कई स्थानों पर स्थानीय लोगों का सहयोग मिल रहा है, लेकिन पहले जिस तरह से गांव के गांव आग बुझाने के लिए वन विभाग कर्मचारियों के साथ आगे आते थे, वह इस बार नहीं दिखाई दे रहा।
दून में राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक वन प्रभाग में कई दिनों से जंगल सुलग रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
है गैर जमानती अपराध, नहीं कर सकते इनकार
वरिष्ठ अधिवक्ता एसडी पंत के मुताबिक जंगल के आस-पास के क्षेत्रों के लोग आग बुझाने में सहयोग मांगे जाने पर बगैर किसी खास वजह के इससे इनकार नहीं कर सकते।
यह गैर जमानती अपराध है, ऐसा करने पर छह महीने का कारावास हो सकता है। राजाजी टाइगर रिजर्व में आग लगाते पकड़े जाने पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 30 के तहत तीन साल की जेल हो सकती है। वहीं शिकार के लिए जंगल में आग लगाने पर इससे अधिक सजा और जुर्माना हो सकता है।
जंगल में आग लगाने की प्रमुख वजहें
- शहद निकालने के लिए धुआं उठाना
- नई घास के लिए जंगल में आग लगाना
- झाड़ियां आदि साफ करने के लिए
- जानवरों का शिकार करने के लिए
- अवैध पातन के बाद अपराध छिपाने के लिए
- जंगल में जलती बीड़ी-सिगरेट फेंकना