चारधाम यात्रा को लेकर एजेंसियां सतर्क, गृहमंत्री ने की अफसरों संग बैठक
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डीजीपी ने जानकारी दी कि सकुशल चारधाम यात्रा संपन्न कराने को लेकर भारी पुलिस बल तैनात करने के साथ ही एसडीआरएफ की चार कंपनियां तैनात की गई हैं। साल 2013 में आई त्रासदी से सबक लेते हुए वाहनों और यात्रियों का हरिद्वार में पंजीकरण कराने के साथ ही यात्रा मार्गों पर कई अन्य जगहों पर पंजीकरण शिविर लगाए गए हैं।
प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर स्टेट डिजास्टर रेसपांस फोर्स (एसडीआरएफ) के साथ डीएमवीएसएफ का भी सहयोग लिया जाएगा।
राज्यपाल के निर्णयों पर गृह मंत्री ने की चर्चा
गृह मंत्री ने बैठक में राष्ट्रपति शासन के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों पर भी चर्चा की। राज्यपाल के राजस्व पुलिस क्षेत्र में पुलिस थाना त्यूनी जनपद देहरादून हेतु लंबित अधिसूचना को जारी किए जाने संबंधी निर्णय समेत पौडी गढ़वाल में थाना थलीसैंण, रूद्रप्रयाग की जगह सोनप्रयाग में पुलिस थाना की स्थापना, पौड़ी के तहसील थलीसैंण एवं टिहरी में पुलिस थाना, 45 वर्ष से अधिक उम्र के मुख्य आरक्षी जो वर्तमान में उप निरीक्षक का वेतन प्राप्त करने वाले उप निरीक्षक, विशेष श्रेणी पद पर नामित किये जाने संबंधी राज्यपाल के निर्णयों पर भी चर्चा की।
इसके अलावा पुलिस मुख्यालय में स्थित राज्य स्तरीय ‘राज्य महिला सहायता प्रकोष्ठ’ के कामकाज की भी समीक्षा की गई। जिसका नाम अब सरकार द्वारा ‘महिला सुरक्षा हेल्पलाइन’ कर दिया गया है। हेल्पलाइन का टोल फ्री नंबर 18001804111 है। यह प्रकोष्ठ पीड़ित महिलाओं से सीधे समस्या सुनने के साथ-साथ जनपदों में महिलाओं के प्रति घटित अपराधों की मॉनिटिरिंग भी करेगा।
पुलिसकर्मियों के खाते में भेजा एरियर
वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप वेतन एरियर की धनराशि की प्रतिपूर्ति के संबंध में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 के लेखानुदान के तहत प्राप्त धनराशि में से राज्य आकस्मिकता निधि’ से गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में पुलिस कार्मिकों के बढे़ हुए वेतन का एरियर भुगतान किए जाने हेतु अग्रिम आहरित धनराशि की प्रतिपूर्ति भी महालेखाकार को कर दी गई है।
सीसीटीएनएस में उत्तराखंड देश में अव्वल
क्राइम क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) लागू कराने में उत्तराखंड ने सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। अफसरों ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पूरे देश के पुलिस कार्यालयों को नेटवर्किंग के जरिए एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। ताकि अपराध और अपराधियों की सटीक जानकारी का तत्काल आदान प्रदान हो सके। ऐसा होने से थाना स्तर पर सभी अभिलेख स्वयं ही कंप्यूटरीकृत हो जाएंगे।