तल्ख तेवर में दिखे हरीश रावत, राष्ट्रपति शासन का फैसले पलटे
- कैबिनेट बैठक से विधिवत नई पारी की शुरुआत, मंत्रियों के साथ दिल्ली पहुंचे
- पुलिस के कान उमेठे, राज्यपाल के समय का शिक्षा विभाग का फैसला वापस
- अगली कैबिनेट बैठक शनिवार को
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विधानसभा के एक ही कार्यकाल में चार बार मुख्यमंत्री बनने का अदभुत रिकॉर्ड बनाने वाले उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत बृहस्पतिवार को पूरे तेवर में नजर आए। पदभार ग्रहण करने के साथ ही कैबिनेट बैठक कर हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक दिन का मुख्यमंत्री बनने के दौरान बुलाई कैबिनेट बैठक के सर्किल रेट के रिवीजन और पट्टों पर मालिकाना हक जैसे फैसलों पर मुहर लगा दी।
साथ ही राष्ट्रपति शासन में राज्यपाल द्वारा लिए गए शिक्षकों के तबादले और त्यूनी में थाना बनाने के फैसले को पलट दिया। बिजली कटौती पर बिजली विभाग और अपराध के मसले पर पुलिस अधिकारियों को भी सख्ती से टाइट किया। गोपन विभाग के सूत्रों ने बताया कि बुधवार के बाद अगली कैबिनेट बैठक शनिवार को होगी। बैठक के संबंध में सभी विभागों को पत्र भेज दिया गया है।
रावत ने शासन में भी मामूली फेरबदल कर सचिव एमसी जोशी से गोपन, उच्च शिक्षा व वित्त विभाग वापस ले लिया। गोपन अब प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी देखेंगी और इस विभाग के अपर सचिव विनय शंकर पांडेय होंगे। कई मुद्दों पर बैठक और मशक्कत के बाद हरीश रावत पूरे मंत्रिमंडल के साथ राज्यपाल डा. कृष्णकांत पाल से मिलने राजभवन पहुंचे। राज्यपाल से मुलाकात के बाद पूरी कैबिनेट के साथ वे दिल्ली रवाना हो गए। जहां उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश के हालात की जानकारी दी।
कैबिनेट में नहीं हुआ कोई भी नया निर्णय
हरीश रावत बुधवार मध्यरात्रि में ही मुख्यमंत्री पद पर बहाल हो गए थे और बृहस्पतिवार सुबह होते-होते पूरे एक्शन में दिखे। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने बृहस्पतिवार सुबह बीजापुर गेस्ट हाउस में पहली कैबिनेट बैठक बुलाई। यह बैठक पूरी तरह से औपचारिक थी, जिसमें कोई नया निर्णय नहीं हुआ। यह तय किया गया कि विगत 21 और 22 अप्रैल को जो दो कैबिनेट हुई थी, उनके सभी निर्णयों को लागू किया जाएगा।
22 अप्रैल की बैठक में सत्र आहूत करने का जो फैसला लिया था, उसका अब कोई मतलब नहीं रह गया है, बाकी सभी फैसले जल्द लागू होंगे। बैठक में सभी मंत्रियों की मौजूदगी रही। शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में रावत ने स्पष्ट कहा कि मेरे पास ज्यादा समय नहीं है, इसलिए कामकाज में तेजी आनी चाहिए।
हरीश ने राष्ट्रपति शासन में राज्यपाल के न केवल दो अहम फैसले पलट दिए, बल्कि सूत्रों की मानें तो उन्होंने राज्यपाल शासन के दौरान लिए गए सभी फैसलों का रिव्यू करने की भी अपनी मंशा जाहिर कर दी। राष्ट्रपति शासन के दौरान सभी विभागों में लिए गए फैसलों की सूची तलब की गई है।
बिजली समस्या पर सीएम ने दिखाया सख्त रुख
राज्य के विभिन्न इलाकों में बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति को लेकर नाराज मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक एसएस यादव और यूजेवीएनएल के निदेशक एसएन वर्मा को तलब कर बिजली आपूर्ति की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने दोनों अफसरों से कहा कि बिजली आपूर्ति को लेकर तमाम शिकायतें सामने आ रही हैं ऐसे में जलविद्युत गृहों में होने वाले बिजली उत्पादन में सुधार की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि नेशनल ग्रिड से बिजली लेकर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने पावर रोस्टिंग को न्यूनतम स्तर पर लाने और 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए आवश्यक उपाय करने को कहा। दोनों प्रबंध निदेशकों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो सके, इसके लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं।
उमेठे पुलिस के भी कान, कहा संतुष्ट नहीं
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुलिस विभाग की बैठक में भी नाराजगी जताते हुए कहा कि भू-माफिया के खिलाफ एसआईटी के काम से मैं संतुष्ट नहीं हूं। उन्होंने 18 मार्च के मनी बिल के एपिसोड के लिए इंटेलीजेंस को भी निशाने पर लिया और कहा कि आप लोगों ने कुछ नहीं किया।
सीएम ने पुलिस विभाग के तहत आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) स्थापित करने के निर्देश दिए, जो बेनामी संपत्तियों व भूमि संबंधी अपराधों पर फोकस करेगी। बृहस्पतिवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों में कानून का डर नहीं दिख रहा है। पुलिस विभाग को प्रो-एक्टिव होना होगा।
उन्होंने कहा कि तत्काल आर्थिक अपराध शाखा स्थापित हो, जो प्रदेश भर में बेनामी संपत्ति के मामलों की जांच करें। भूमि विवाद संबंधी अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि के संबंध में हुए अपराधों का जल्द खुलासा हो और अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसा जाना चाहिए। केवल शिकायत के आधार पर ही नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव होकर भी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
पुरानी दो कैबिनेट बैठकों के निर्णय होंगे लागू
मुख्यमंत्री अभिसूचना तंत्र के समन्वय को बढ़ाने की हिदायत भी दी और कहा कि विजिलेंस को भी सक्रिय होना होगा। बैठक में डीजीपी एमए गणपति, एडीजी अनिल कुमार रतूड़ी, एडीजी कानून व्यवस्था रामसिंह मीणा, एडीजी इंटेलीजेंस अशोक कुमार, आईजी कानून व्यवस्था दीपम सेठ, आईजी इंटेलीजेंस अजय प्रताप अंशुमन, आईजी पीएसी अमित सिन्हा, आईजी संजय गुंज्याल सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
21 अप्रैल की रात में ये लिए गए थे फैसले
- राजकीय कालेजों में दो पाली में संचालित की जाएंगी कक्षाएं
- राज्य के सभी अतिथि शिक्षकों को 15000 मासिक मानदेय
- समाज कल्याण विभाग की तमाम पेंशन योजनाओं में 200 रुपये का इजाफा
- वित्त मंत्री की अध्यक्षता में जमीनों के सर्किल रेट रिवीजन कमेटी का गठन
- चकबंदी व मलिन बस्ती सुधार विधेयक का अध्यादेश जारी करने का फैसला
- हल्द्वानी व देहरादून में स्पोर्ट्स स्टेडियम को अपने वित्तीय संसाधनों से विकसित करने का निर्णय
- पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रत्येक जिले को पांच पांच करोड़ रुपये
- राठ महाविद्यालय पौड़ी और लाल कुआं में लाल बहादुर शास्त्री राजकीय महाविद्यालय का राजकीयकरण
रावत सरकार के मौजूदा कार्यकाल की पहली कैबिनेट में निर्णय
22 अप्रैल की सुबह कैबिनेट में लिए गए निर्णय
- राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन
- जमीनों के पट्टाधारकों को मालिकाना हक