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महिला चिकित्सालय फिर बना प्रदेश का नंबर वन अस्पताल
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जिला महिला चिकित्सालय ।
- फोटो : HARIDWAR
जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार को फिर से कायाकल्प योजना के तहत प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया है। अब केंद्र सरकार की तरफ से अस्पताल को 50 लाख रुपये की धनराशि पुरस्कार के रूप में दी जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में कायाकल्प योजना शुरू की गई थी। योजना का मकसद अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। कायाकल्प कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार की ओर बनाए गए मानकों के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जाना, स्वास्थ्य उपकरणों का रख-रखाव, कचरा प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, उपचार के दौरान सहायक सेवाएं और स्वच्छता प्रमुख है।
स्वास्थ्य सेवाओं का उच्चीकरण करना, मरीजों और तीमारदारों के लिए बैठने और पेयजल की व्यवस्था करना, लोगों को अस्पताल के अंदर और बाहर बीमारियों को फैलने से रोकने और बचाव, उपाय के बारे में जागरूक करना है। इन सब पर खरा उतरने पर जिला महिला चिकित्सालय ने फिर से पहले पहले स्थान पर आने में कामयाबी हासिल की है। बता दें कि इससे पहले भी 2016 और 2018 में भी अस्पताल प्रदेश में नंबर एक स्थान पर आकर यह पुरस्कार जीत चुका है।
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यह पुरस्कार डॉक्टरों समेत सभी स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मचारियों के सहयोग से ही जीता जा सका है। पुरस्कार के रूप में मिलने वाली 50 लाख रुपये की धनराशि का प्रयोग भी अस्पताल में मरीजों को और बेहतर सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा।
- डॉ. राजेश गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में कायाकल्प योजना शुरू की गई थी। योजना का मकसद अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। कायाकल्प कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार की ओर बनाए गए मानकों के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है। जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जाना, स्वास्थ्य उपकरणों का रख-रखाव, कचरा प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, उपचार के दौरान सहायक सेवाएं और स्वच्छता प्रमुख है।
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स्वास्थ्य सेवाओं का उच्चीकरण करना, मरीजों और तीमारदारों के लिए बैठने और पेयजल की व्यवस्था करना, लोगों को अस्पताल के अंदर और बाहर बीमारियों को फैलने से रोकने और बचाव, उपाय के बारे में जागरूक करना है। इन सब पर खरा उतरने पर जिला महिला चिकित्सालय ने फिर से पहले पहले स्थान पर आने में कामयाबी हासिल की है। बता दें कि इससे पहले भी 2016 और 2018 में भी अस्पताल प्रदेश में नंबर एक स्थान पर आकर यह पुरस्कार जीत चुका है।
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यह पुरस्कार डॉक्टरों समेत सभी स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मचारियों के सहयोग से ही जीता जा सका है। पुरस्कार के रूप में मिलने वाली 50 लाख रुपये की धनराशि का प्रयोग भी अस्पताल में मरीजों को और बेहतर सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा।
- डॉ. राजेश गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक