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मतदान नजदीक आते ही वोटों के सौदागर सक्रिय
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मतदान के लिए अब कुछ ही दिन बाकी हैं। 14 फरवरी को मतदान है। ऐसे में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालय में नाश्ते से लेकर खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई हैं। जनसंपर्क में पहुंचने वाले प्रत्याशियों से वोटों के सौदागर खुलकर कुछ खर्च करने को कहने लगे हैं। कोई गाड़ी में पेट्रोल तो कोई पैसे मांग रहे हैं। जनसंपर्क में पहुंचने वाले प्रत्याशियों को वोटों के सौदागरों से दो-चार होना पड़ रहा है। चुनाव है नेता जी सीधे टरका भी नहीं पा रहे हैं।
मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे ही प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की धड़कनें भी तेज हो रही हैं। प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। देहात से लेकर शहर के गली-मोहल्ले और गांवों में वोटों के सौदागर भी सक्रिय हो गए हैं। सौदागर समाज और जातियों में अपना वर्चस्व बताकर नेता जी पक्ष में मताधिकार करवाने का दावा कर रहे हैं। बदले में डिमांड की जा रही है।
वोटों के सौदागर चुनाव में प्रत्याशियों को जातिगत आंकड़े गिना रहे हैं। प्रति घर के वोटों के हिसाब से पैकेज भी समझा रहे हैं। गांव में जहां समुदाय के हिसाब से तो शहरी क्षेत्र में मोहल्ले के हिसाब से प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाने का लालच देकर प्रत्याशियों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। चुनाव आयोग की सख्ती के चलते प्रत्याशी इस बार बड़ी रैलियां और जनसभाएं नहीं कर पा रहे हैं। हर मतदाता तक पहुंचने का उनके पास समय भी नहीं है। ऐसे में वोटों के सौदागरों के साथ गठबंधन करना उनकी मजबूरी हो रही है।
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मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे ही प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की धड़कनें भी तेज हो रही हैं। प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। देहात से लेकर शहर के गली-मोहल्ले और गांवों में वोटों के सौदागर भी सक्रिय हो गए हैं। सौदागर समाज और जातियों में अपना वर्चस्व बताकर नेता जी पक्ष में मताधिकार करवाने का दावा कर रहे हैं। बदले में डिमांड की जा रही है।
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वोटों के सौदागर चुनाव में प्रत्याशियों को जातिगत आंकड़े गिना रहे हैं। प्रति घर के वोटों के हिसाब से पैकेज भी समझा रहे हैं। गांव में जहां समुदाय के हिसाब से तो शहरी क्षेत्र में मोहल्ले के हिसाब से प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाने का लालच देकर प्रत्याशियों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। चुनाव आयोग की सख्ती के चलते प्रत्याशी इस बार बड़ी रैलियां और जनसभाएं नहीं कर पा रहे हैं। हर मतदाता तक पहुंचने का उनके पास समय भी नहीं है। ऐसे में वोटों के सौदागरों के साथ गठबंधन करना उनकी मजबूरी हो रही है।
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