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गेहूं की सबसे कम खरीदारी, सरकारी गोदाम रह गए खाली
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एक दशक में पहली बार सरकारी गेहूं की सबसे कम खरीदारी हुई है। इससे सरकारी गोदाम खाली रह गए हैं। इसकी वजह गेहूं का कम उत्पादन होना और खुले बाजार में भाव अधिक मिलना बताया जा रहा है। गेहूं खरीद प्रभावित होने से सरकारी राशन वितरण प्रणाली प्रभावित हो सकती है। वहीं सरकार ने अभी से मुफ्त राशन योजना में गेहूं की कटौती कर चावल बढ़ा दिया है।
गेहूं की खरीदारी के लिए इस बार जिले में 34 क्रय केंद्र स्थापित किए गए थे। अधिकारियों को दो लाख कुंतल खरीद का लक्ष्य दिया गया था लेकिन जनपद में मात्र 11 हजार 198 कुंतल की खरीदारी हुई है। इससे विभाग खरीदारी के लक्ष्य से एक लाख 88 हजार 802 कुंतल पीछे चल रहा है। गेहूं की खरीदारी कम होने से पहले ही सरकार की ओर से मुफ्त राशन योजना में उपभोक्ताओं के गेहूं में कटौती करते हुए जून से तीन किलो गेहूं के बजाय उपभोक्ताओं को मात्र एक किलो गेहूं मिलेगा। वहीं, दो किलो चावल के बजाय चार किलो चावल देकर गेहूं की भरपाई की जाएगी। गेहूं की कम खरीदारी होने से आने वाले समय में अन्य खाद्यान्न योजनाओं में भी गेहूं कम किया जा सकता है।
पिछले साल टूटा था रिकॉर्ड
सरकार की ओर से खरीदे जाने वाले गेहूं ने पिछले साल सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए गए थे। 2021 में एक लाख 93 हजार 440 कुंतल गेहूं सरकारी केंद्रों पर खरीदा गया था जो सबसे अधिक गेेेेहूं खरीद माना गया था। 2020 में भी 61 हजार कुंतल खरीदा गया था।
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खुले बाजार में अधिक दाम रही वजह
कम गेहूं की खरीदारी का मुख्य वजह खुले बाजार में सरकारी दाम के मुकाबले अधिक रहना माना जा रहा है। सरकार की ओर से 2015 प्रति कुंतल दाम घोषित किया गया था। इसके अलावा 20 रुपये प्रति कुंतल बोनस अलग से घोषणा बाद में की गई थी। इससे किसानों को कुल मिलाकर 2035 रुपये प्रति कुंतल मूल्य गेहूं का सरकारी केंद्रों पर मिला। वहीं खुले बाजार में 2050 रुपये से लेकर 2200 रुपये प्रति कुंतल तक दाम रहा है। इसके कारण किसानों ने सरकारी केंद्रों की तरफ रुख नहीं किया। सरकार की ओर से जनपद भर में गेहूं की खरीद के लिए 34 क्रय केंद्र खोले गए थे। इनमें से 14 केंद्र तो ऐसे रहे हैं जिन पर एक भी दाने की खरीद नहीं हो सकी है। ये जो गेहूं खरीदा गया है, वह केवल 20 केंद्रों पर खरीदा गया है।
30 जून तक बढ़ाई खरीद
सरकार की ओर से पहले गेहूं की खरीदारी के लिए 31 मई अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अब कम खरीदारी के चलते अब 30 जून तक खरीदारी की डेट बढ़ा दी गई है। हालांकि, अब किसानों के पास गेहूं बचा ही नहीं है। ऐसे में डेट बढ़ाकर भी कोई लाभ होने वाला नहीं है।
खुले बाजार में दाम अधिक रहने से किसानों की ओर से सरकारी केंद्रों पर कम गेहूं बेचा गया है। गेहूं की खरीदारी इस बार कम रही है। अब भी अगर किसी के पास गेहूं है तो किसान केंद्रों पर जाकर बेच सकते हैं। - अनु जयकरे, उप संभागीय विपणन अधिकारी, गढ़वाल
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गेहूं की खरीदारी के लिए इस बार जिले में 34 क्रय केंद्र स्थापित किए गए थे। अधिकारियों को दो लाख कुंतल खरीद का लक्ष्य दिया गया था लेकिन जनपद में मात्र 11 हजार 198 कुंतल की खरीदारी हुई है। इससे विभाग खरीदारी के लक्ष्य से एक लाख 88 हजार 802 कुंतल पीछे चल रहा है। गेहूं की खरीदारी कम होने से पहले ही सरकार की ओर से मुफ्त राशन योजना में उपभोक्ताओं के गेहूं में कटौती करते हुए जून से तीन किलो गेहूं के बजाय उपभोक्ताओं को मात्र एक किलो गेहूं मिलेगा। वहीं, दो किलो चावल के बजाय चार किलो चावल देकर गेहूं की भरपाई की जाएगी। गेहूं की कम खरीदारी होने से आने वाले समय में अन्य खाद्यान्न योजनाओं में भी गेहूं कम किया जा सकता है।
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पिछले साल टूटा था रिकॉर्ड
सरकार की ओर से खरीदे जाने वाले गेहूं ने पिछले साल सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए गए थे। 2021 में एक लाख 93 हजार 440 कुंतल गेहूं सरकारी केंद्रों पर खरीदा गया था जो सबसे अधिक गेेेेहूं खरीद माना गया था। 2020 में भी 61 हजार कुंतल खरीदा गया था।
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खुले बाजार में अधिक दाम रही वजह
कम गेहूं की खरीदारी का मुख्य वजह खुले बाजार में सरकारी दाम के मुकाबले अधिक रहना माना जा रहा है। सरकार की ओर से 2015 प्रति कुंतल दाम घोषित किया गया था। इसके अलावा 20 रुपये प्रति कुंतल बोनस अलग से घोषणा बाद में की गई थी। इससे किसानों को कुल मिलाकर 2035 रुपये प्रति कुंतल मूल्य गेहूं का सरकारी केंद्रों पर मिला। वहीं खुले बाजार में 2050 रुपये से लेकर 2200 रुपये प्रति कुंतल तक दाम रहा है। इसके कारण किसानों ने सरकारी केंद्रों की तरफ रुख नहीं किया। सरकार की ओर से जनपद भर में गेहूं की खरीद के लिए 34 क्रय केंद्र खोले गए थे। इनमें से 14 केंद्र तो ऐसे रहे हैं जिन पर एक भी दाने की खरीद नहीं हो सकी है। ये जो गेहूं खरीदा गया है, वह केवल 20 केंद्रों पर खरीदा गया है।
30 जून तक बढ़ाई खरीद
सरकार की ओर से पहले गेहूं की खरीदारी के लिए 31 मई अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अब कम खरीदारी के चलते अब 30 जून तक खरीदारी की डेट बढ़ा दी गई है। हालांकि, अब किसानों के पास गेहूं बचा ही नहीं है। ऐसे में डेट बढ़ाकर भी कोई लाभ होने वाला नहीं है।
खुले बाजार में दाम अधिक रहने से किसानों की ओर से सरकारी केंद्रों पर कम गेहूं बेचा गया है। गेहूं की खरीदारी इस बार कम रही है। अब भी अगर किसी के पास गेहूं है तो किसान केंद्रों पर जाकर बेच सकते हैं। - अनु जयकरे, उप संभागीय विपणन अधिकारी, गढ़वाल