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शीतला माता मंदिर में होती है भक्तों की मुराद पूरी
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कनखल स्थित शीतला माता मंदिर ।
- फोटो : HARIDWAR
सनातन धर्म में आदि शक्ति को मातृ स्वरूप मानकर उनकी अनेक रूपों में पूजा की जाती है। इन्हीं में एक हैं भगवती शीतला माता जिन्हें आरोग्य और स्वच्छता की देवी माना जाता है। कनखल स्थित शीतला माता मंदिर में श्रद्धालु संतान की आरोग्यता और दीर्घायु के लिए मां की पूजा-अर्चना करते हैं। कोरोना काल में करीब दो साल बाद मां शीतला देवी के इस मंदिर में मेले का आयोजन होगा। शीतला अष्टमी पर श्रद्धालु मां की पूजा अर्चना करेंगे।
धर्मनगरी के कनखल में स्थित शीतला माता का मंदिर पौराणिक है। पुराणों के अनुसार शीतला माता का यह मंदिर देवी सती का जन्म स्थान है। राजा दक्ष ने अपनी कुलदेवी मां शीतला के लिए यहां पर कठोर तपस्या की थी। इसके बाद शीतला मां ने राजा दक्ष की मनोकामना पूरी की थी। सतयुगीन इस मान्यता के आधार पर इस स्थान पर लोग शीतला माता की पूजा करते आ रहे हैं।
ऐसी मान्यता है कि मंदिर में पूजा-अर्चना करने से शीतला माता की अनुकंपा से लोग रोग मुक्त हो जाते हैं। वैसे तो साल भर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन शीतला अष्टमी पर माताएं संतान की आरोग्यता के लिए बड़ी संख्या में मंदिर में शीतला माता का पूजन करती हैं। हलवा और पूड़ी का भोग लगाया जाता है। इस दिन माता शीतला को खासतौर पर मीठे चावलों का भोग लगाया जाता है।
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मां शीतला माता मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनोद गहतोड़ी ने बताया कि मान्यता के अनुसार यहां पूजा-अर्चना करने से लोगों को हर प्रकार की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है। शीतला अष्टमी पर हर वर्ष मेले का आयोजन भी होता है। कोरोना काल में दो साल तक नियमों क अनुसार शीतला अष्टमी पर पूजन हुआ। इस बार कोरोना संक्रमण कम होने के चलते मंदिर में अच्छी खासी भीड़ श्रद्धालुओं की रहेगी।
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धर्मनगरी के कनखल में स्थित शीतला माता का मंदिर पौराणिक है। पुराणों के अनुसार शीतला माता का यह मंदिर देवी सती का जन्म स्थान है। राजा दक्ष ने अपनी कुलदेवी मां शीतला के लिए यहां पर कठोर तपस्या की थी। इसके बाद शीतला मां ने राजा दक्ष की मनोकामना पूरी की थी। सतयुगीन इस मान्यता के आधार पर इस स्थान पर लोग शीतला माता की पूजा करते आ रहे हैं।
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ऐसी मान्यता है कि मंदिर में पूजा-अर्चना करने से शीतला माता की अनुकंपा से लोग रोग मुक्त हो जाते हैं। वैसे तो साल भर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन शीतला अष्टमी पर माताएं संतान की आरोग्यता के लिए बड़ी संख्या में मंदिर में शीतला माता का पूजन करती हैं। हलवा और पूड़ी का भोग लगाया जाता है। इस दिन माता शीतला को खासतौर पर मीठे चावलों का भोग लगाया जाता है।
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मां शीतला माता मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनोद गहतोड़ी ने बताया कि मान्यता के अनुसार यहां पूजा-अर्चना करने से लोगों को हर प्रकार की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है। शीतला अष्टमी पर हर वर्ष मेले का आयोजन भी होता है। कोरोना काल में दो साल तक नियमों क अनुसार शीतला अष्टमी पर पूजन हुआ। इस बार कोरोना संक्रमण कम होने के चलते मंदिर में अच्छी खासी भीड़ श्रद्धालुओं की रहेगी।