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हरिद्वार में भी बसे कैराना के दो परिवार

Sun, 12 Jun 2016 12:11 AM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Sun, 12 Jun 2016 12:11 AM IST
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The two families also settled in Haridwar Kairana
हरिद्वार में बसे कैराना के परिवार - फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार। यूपी के कैराना से पलायन करने वाले 346 परिवारों में से दो परिवार शहर से सटे जमालपुर गांव में बस गए हैं। दोनों परिवार दहशतजदा है। जानकारी के अनुसार रुड़की क्षेत्र में भी कई परिवार बसे हैं। कैराना के माहौल पर ये लोग अधिक नहीं बोलना चाहते हैं। इनका कहना है कि उनके परिवारों के कुछ लोग अभी वहीं हैं। उनकी जान को खतरा हो सकता है। वे बताते हैं कि कैराना छोड़ने के पीछे उन्हें पारिवारिक कारण बताने की हिदायत दी जाती है। उन्होंने भाजपा सांसद हुकुम सिंह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया कि उन्हें इन हालातों की पहले से ही जानकारी थी।  

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मुजफ्फरनगर के कवाल कांड के बाद से कैराना में पलायन शुरू हुआ है। हरिद्वार शहर से सटे गांव जमालपुर में कैराना से आए दो परिवार बसे हैं। लीलावती पत्नी स्वर्गीय सत्यप्रकाश निवासी मोहल्ला गुंबद जोड़िया कुएं के पास से अपने दो बेटों दीपक (34), अमित (38) और उनके बच्चों के साथ जमालपुर में आकर बस गई। उसके दोनों बेटे कैराना में हलवाई का काम करते थे, लेकिन वहां पर विशेष वर्ग की इतनी ज्यादती बढ़ गई कि उन्हें अपना मकान बेचना पड़ा। लीलावती कहती हैं कि उन पर हुए अत्याचार को वह नहीं बताना चाहतीं। वह कहती है कि कवाल कांड के बाद ही वहां पर अत्याचार बढ़ा है। किसी के घर में चिट्ठी डालकर तो कइयों से सीधे ही फिरौती मांग ली जाती है और पुलिस प्रशासन भी कोई मदद नहीं करता।
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साधुराम (65) पुत्र स्वर्गीय दासाराम निवासी अफगानान कैराना अपने दो पुत्रों के परिवार के साथ यहां पर आकर बस गए। वे तहसील में टाइपिस्ट का काम करते थे। उनके दो भाई रोशनलाल और ओमप्रकाश अभी वही पर रहते हैं। ओमप्रकाश नगर पालिका में नौकरी करने के चलते हुए नहीं आ सकते। रोशनलाल खेतीबाड़ी करते हैं। बताते हैं कि जिस समय कवाल कांड हुआ तो मुस्लिम बाहुल्य होने के चलते हुए उन्हें घर छोड़ना पड़ा। उनके खेतों में खड़ी फसल में आग लगा दी गई।  उन्होंने बताया कि वे अपना घर बेच चुके हैं, अब खेती की भूमि को बेचने का प्रयास कर रहे हैं। जिस भूमि की कीमत 8 लाख प्रति बीघा थी, अब उसे कोई 4 लाख में खरीदने को तैयार नहीं है।
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लूट ली 10 क्विंटल धान
साधुराम ने बताया कि उसका भाई रोशनलाल खेतीबाड़ी करता है। पिछले साल उसके खेत में धान की फसल बहुत अच्छी हुई थी। जिस समय उसने काटकर बोरियों में भरी तो दर्जन भर लोग हथियारों से लैस होकर पहुंचे और दस क्विंटल धान लूट लिया। विरोध किया तो मारपीट कर दी।

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अन्य लोग भी जाने को तैयार
लीलावती बतातीं है कि डा. निर्मल, मूला पंसारी, सेवा लस्सीवाला, ओम प्रकाश, दीपू हलवाई, राकेश, कंवरपाल सहित सैकड़ों परिवार कैराना से चले गए। अभी यह जाने का सिलसिला थमा नहीं है। कभी कभार गांव जाते हैं तो अन्य लोग भी यही कहते हैं कि वे कभी भी कैराना छोड़ सकते हैं।

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