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हरकी पैड़ी पर बह रही धारा गंगा नहीं
रतनमणी डोभाल हरिद्वार
Updated Fri, 17 Mar 2017 10:51 PM IST
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उत्तराखंड शासन ने सौ साल से अधिक समय के बाद गंगा की परिभाषा बदल दी है। शासन में हरकी पैड़ी पर बहने वाली धारा को गंगा नहीं बल्कि स्कैप चैनल माना है। मजेदार बात यह है कि पिछले साल दिसंबर में जारी शासनादेश में गंगा कहां बह रही इसका जिक्र ही नहीं है। गंगा की इस नई परिभाषा के अनुसार अब हरकी पैड़ी और उसके आसपास के क्षेत्र में बह रही धारा के 200 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण अब गंगा की इस नई परिभाषा के अनुसार अपने भवन निर्माण के बायलॉज में शामिल कर गंगा से 200 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के भवन निर्माण पर प्रतिबंध की बाधा को समाप्त कर देगा। प्रदेश के आवास सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से 14 दिसंबर को जारी शासनादेश से चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद अब पर्दा हटा है। शासनादेश में बताया गया है कि राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पारित आदेशों के क्रम में मैदानी क्षेत्रों में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संबंध में रेग्यूलेशन पॉलिसी, निर्माण कार्य के लिए गाइड लाइन एवं बायलॉज जारी किया गया है।
शासनादेश में सर्वानंद घाट भूपतवाला से श्मशान घाट खड़खड़ी व हरकी पैड़ी से होते हुए डामकोठी मायापुर और डामकोठी के बाद सतीघाट कनखल होते हुए दक्ष मंदिर तक बहने वाली धारा को स्कैप चैनल घोषित किया है। शासनादेश में कहा गया है कि इस क्षेत्र में जल प्रवाह नियंत्रित होने के कारण बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना नहीं है। मात्र नदी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इस क्षेत्र में निर्माण की अनुमति स्थल पर सीवरेज की समुचित व्यवस्था प्राधिकरण स्तर से सुनिश्चित करवाते हुए दी जाएगी। इसके साथ ही शासन ने गंगा के किनारे निर्माण एवं प्रतिबंध से संबंधित पूर्व के समस्त शासनादेशों को समाप्त कर दिया है।
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अंग्रेजों से लड़कर छुड़वाई थी अविछिन्न धारा
हरकी पैड़ी के लिए गंगा नदी की अविछिन्न धारा प्रवाहित होती रही है। 1914 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने गंगा की प्राकृतिक एवं अविछिन्न धारा को बांध बनाकर अवरुद्ध करके कृत्रिम एवं नियंत्रित धारा के रूप में हरकी पैड़ी में प्रवाहित करने की योजना बनाई थी। इसके खिलाफ तीर्थ-पुरोहितों, विभिन्न क्षेत्रों के राजाओं ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में जनांदोलन किया। जनांदोलन के आगे ब्रिटिश हुक्मरानों को झुकना पड़ा और 1916 में बांध के बंधे हुए जल छोड़ने से हटकर ब्रह्मकुंड हरकी पैड़ी के लिए गंगा नदी की अविछिन्न धारा प्रवाहित होते रहने देने का समझौता करना पड़ा था। जिसे अब एक सौ साल बाद स्कैप चैनल के रूप में परिभाषित किया गया है।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण अब गंगा की इस नई परिभाषा के अनुसार अपने भवन निर्माण के बायलॉज में शामिल कर गंगा से 200 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के भवन निर्माण पर प्रतिबंध की बाधा को समाप्त कर देगा। प्रदेश के आवास सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से 14 दिसंबर को जारी शासनादेश से चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद अब पर्दा हटा है। शासनादेश में बताया गया है कि राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पारित आदेशों के क्रम में मैदानी क्षेत्रों में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संबंध में रेग्यूलेशन पॉलिसी, निर्माण कार्य के लिए गाइड लाइन एवं बायलॉज जारी किया गया है।
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शासनादेश में सर्वानंद घाट भूपतवाला से श्मशान घाट खड़खड़ी व हरकी पैड़ी से होते हुए डामकोठी मायापुर और डामकोठी के बाद सतीघाट कनखल होते हुए दक्ष मंदिर तक बहने वाली धारा को स्कैप चैनल घोषित किया है। शासनादेश में कहा गया है कि इस क्षेत्र में जल प्रवाह नियंत्रित होने के कारण बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना नहीं है। मात्र नदी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इस क्षेत्र में निर्माण की अनुमति स्थल पर सीवरेज की समुचित व्यवस्था प्राधिकरण स्तर से सुनिश्चित करवाते हुए दी जाएगी। इसके साथ ही शासन ने गंगा के किनारे निर्माण एवं प्रतिबंध से संबंधित पूर्व के समस्त शासनादेशों को समाप्त कर दिया है।
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अंग्रेजों से लड़कर छुड़वाई थी अविछिन्न धारा
हरकी पैड़ी के लिए गंगा नदी की अविछिन्न धारा प्रवाहित होती रही है। 1914 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने गंगा की प्राकृतिक एवं अविछिन्न धारा को बांध बनाकर अवरुद्ध करके कृत्रिम एवं नियंत्रित धारा के रूप में हरकी पैड़ी में प्रवाहित करने की योजना बनाई थी। इसके खिलाफ तीर्थ-पुरोहितों, विभिन्न क्षेत्रों के राजाओं ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में जनांदोलन किया। जनांदोलन के आगे ब्रिटिश हुक्मरानों को झुकना पड़ा और 1916 में बांध के बंधे हुए जल छोड़ने से हटकर ब्रह्मकुंड हरकी पैड़ी के लिए गंगा नदी की अविछिन्न धारा प्रवाहित होते रहने देने का समझौता करना पड़ा था। जिसे अब एक सौ साल बाद स्कैप चैनल के रूप में परिभाषित किया गया है।