{"_id":"6f9f6c58d3b64f076c4243f545da99ca","slug":"the-prisoner-died-in-jail-hanging-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल में कैदी ने फांसी लगाकर दी जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेल में कैदी ने फांसी लगाकर दी जान
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार। रेप के आरोप में दस साल की सजा काट रहे कैदी ने मंगलवार दोपहर लुंगी (तहमद) के फंदे से फांसी लगाकर जेल की बैरक में खुदकुशी कर ली। खुदकुशी की वजह साफ नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
मंगलौर क्षेत्र के गांव झबीरन का रहने वाला 41 वर्षीय तीर्थपाल पुत्र चमनलाल 29 अप्रैल 2010 से जेल में था। रेप के आरोप में उसे दस वर्ष की कैद हुई थी और पांच साल नौ माह की सजा भी पूरी कर ली थी। पेशे से नाई रहा तीर्थपाल जेल में भी नाई का ही कार्य करता था। मंगलवार को जेल कैंपस में बनी नई बैरक सात ए और बी के खुले क्षेत्र में कैदियों के बाल काटे जा रहे थे। दोपहर को जब बैरक संख्या पांच-ए में कैदियों की गिनती शुरू हुई तब तीर्थपाल गायब मिला। तीर्थपाल की तलाश शुरू की गई तो बैरक सात बी में पंखे पर झूलता मिला। जेल अधीक्षक एसके सुखीजा, जेलर एमबी सिंह तुरंत मौके पर पहुंच गए। तुरंत ही कैदी को उतारकर एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक ने बताया कि कैदी का कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, उसकी खुदकुशी की कोई वजह सामने नहीं आई है।
विज्ञापन
------------
साहब मेरी पैरोल करा देना
हरिद्वार। एक बेटी की शादी में शरीक होने से वंचित रह गए तीर्थपाल ने दूसरी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए जेल अधीक्षक एसके सुखीजा से पैरोल करा देने की गुहार लगाई थी। जेल अधीक्षक ने आश्वस्त किया था कि, वे उसकी हर संभव मदद करेंगे, जिससे की उसे पैरोल मिल जाए। कुछ समय बाद ही उसकी दूसरी बेटी की शादी होनी है।
विज्ञापन
-----------
एक कैदी पहले कर चुका खुदखुशी
हरिद्वार। जिला जेल में पूर्व में भी एक कैदी राजू ने फांसी के फंदे पर झूलकर जान दे दी थी। उसने शौचालय में फांसी लगाई थी और एक अन्य कैदी ने भी खुदकुशी करनी चाही थी लेकिन उसे समय रहते बचा लिया गया था।