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संतों का जीवन सदैव परोपकार को समर्पित रहता है:रविन्द्रपुरी
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ब्रह्मलीन महंत गंगासागर भारती के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीम
- फोटो : HARIDWAR
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी (महानिर्वाणी) ने कहा है कि संतों का जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत गंगासागर भारती एक महान संत थे।
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की छावनी में आयोजित ब्रह्मलीन महंत गंगासागर भारती के श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर त्यागते हैं। समाज कल्याण के लिए उनकी आत्मा सदैव व्यावहारिक रूप से उपस्थित रहती है।
महंत कैलाश भारती ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत गंगासागर भारती एक तपस्वी एवं विद्वान संत थे। जिन्होंने गंगा तट से अनेकों सेवा प्रकल्प चलाकर समाज को सेवा का संदेश दिया और धर्म एवं संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाया। महंत पूरन भारती ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। इस दौरान महंत देवगिरी, महंत अखिलेश भारती, महंत रावेंद्रपुरी, महंत कमलपुरी, बाबा ज्ञान भारती, बाबा किशनपुरी, बाबा मनोज गिरि, बाबा सूर्य मोहनगिरि, स्वामी संगम गिरि आदि उपस्थित रहे।
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श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की छावनी में आयोजित ब्रह्मलीन महंत गंगासागर भारती के श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर त्यागते हैं। समाज कल्याण के लिए उनकी आत्मा सदैव व्यावहारिक रूप से उपस्थित रहती है।
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महंत कैलाश भारती ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत गंगासागर भारती एक तपस्वी एवं विद्वान संत थे। जिन्होंने गंगा तट से अनेकों सेवा प्रकल्प चलाकर समाज को सेवा का संदेश दिया और धर्म एवं संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाया। महंत पूरन भारती ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। इस दौरान महंत देवगिरी, महंत अखिलेश भारती, महंत रावेंद्रपुरी, महंत कमलपुरी, बाबा ज्ञान भारती, बाबा किशनपुरी, बाबा मनोज गिरि, बाबा सूर्य मोहनगिरि, स्वामी संगम गिरि आदि उपस्थित रहे।
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