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Independence Day 2021: आज भी सुनाए जाते हैं मुक्खा सिंह के किस्से, ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ किया था विद्रोह
Wed, 11 Aug 2021 01:56 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 11 Aug 2021 01:56 PM IST
सार
कटारपुर गांव में 1918 में मुक्खा सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। तब अंग्रेजों का आतंक और शोषण चरम पर था।
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पहले स्वतंत्रता दिवस की एक दुर्लभ तस्वीर
- फोटो : Facebook/Suranjan Karmakar
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विस्तार
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने वाले कटारपुर गांव के क्रांतिकारी मुक्खा सिंह चौहान की बहादुरी के किस्से आज भी हर ग्रामीण की जुबान पर हैं। अंग्रेजों ने मुक्खा सिंह को फांसी पर लटका दिया था। मुक्खा सिंह का साथ देने वाले ग्रामीणों को काला पानी की सजा सुनाई गई। देश की आजादी के बाद मुक्खा सिंह की याद में कटारपुर में स्मारक बना। हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के अलावा मुक्खा सिंह की शहादत दिवस पर ग्रामीणों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
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कटारपुर गांव में 1918 में मुक्खा सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। तब अंग्रेजों का आतंक और शोषण चरम पर था। मुक्खा सिंह की बहादुरी के किस्से कहानियां आज भी गांव में बच्चों को सुनाई जाती हैं। बताते हैं, एक अंग्रेज अधिकारी अपनी बटालियन के साथ सितंबर 1918 में गांव आया। अंग्रेज अधिकारी ने दूसरे समुदाय के त्योहार पर गायों के कत्लेआम का फरमान जारी कर दिया था।
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अंग्रेज अधिकारी का फरमान गांव में आग की तरफ फैल गया। अंग्रेजों केे जुल्म से परेशान ग्रामीणों ने चैनसुख के पुत्र मुक्खा सिंह चौहान की अगुवाई में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी। अंग्रेज अधिकारी ने पांच गायों को एक पेड़ के नीचे मारने के लिए बांध दिया। गायों का कत्ल करने से पहले मुक्खा सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अंग्रेजों पर हमला बोल दिया। गायों को आजाद कर दिया। इससे अंग्रेजों की नींद उड़ गई।
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मुक्खा सिंह और ग्रामीणों के इस दुस्साहस से अंग्रेज आग बबूला हो गए। अंग्रेजों ने 135 ग्रामीणों को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया। अगस्त 1919 में मुक्खा सिंह चौहान और कई ग्रामीणों को दस साल की काला पानी की सजा सुनाई गई। आठ फरवरी 1920 को अंग्रेजों ने मुक्खा सिंह चौहान को गांव में उसी पेड़ पर फांसी दे दी।
देश आजाद होने के बाद ग्रामीणों ने मुक्खा सिंह चौहान की याद में गोरक्षक स्मारक बनाया। स्मारक उसी पेड़ के पास बनाया गया, जहां अंग्रेज अधिकारी ने पांच गायों को मारने के लिए बांधा था। हरिद्वार लक्सर मार्ग से जुड़ने वाले गांव के मुख्य मार्ग पर इसी साल मुक्खा सिंह चौहान के नाम से मुख्य द्वार का निर्माण भी कराया गया है।