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स्वामी शिवानंद से बात करने पहुंचे अपर मुख्य सचिव

Wed, 03 Jun 2015 02:24 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार Updated Wed, 03 Jun 2015 02:24 AM IST
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swami shivanand

देहरादून जिले के रायवाला से लेकर हरिद्वार के भोगपुर तक गंगा में खनन पूरी तरह से बंद करने पर सहमति बन गई है। मातृसदन के संतों की ओर से दिए गए तर्कों को अधिकारियों ने माना और उनकी मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखने की बात कही गई।

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एक-दो दिन में मुख्यमंत्री के हरिद्वार आने की उम्मीद है, उसी दिन गंगा में खनन बंदी पर अंतिम निर्णय होगा। तब तक मातृसदन के दोनों संतों का अनशन जारी रहेगा। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, गढ़वाल कमिश्नर एमएस नपल्चयाल और खनन निदेशक श्रीधर बाबू मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे मातृसदन पहुंचे।
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उनके साथ हरिद्वार के जिलाधिकारी हरिचंद्र सेमवाल भी थे लेकिन जिलाधिकारी वार्ता से अलग ही रहे। अधिकारियों और मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती के बीच करीब डेढ़ घंटे की वार्ता हुई। इसके बाद पत्रकारों से स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि वर्ष 1952 के नोटिफिकेशन के मुताबिक रायवाला से अजीतपुर तक गंगा में किसी तरह से खनन नहीं हो सकता।
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अब इसे बढ़ाकर रायवाला से भोगपुर तक करने की सहमति बनी है। शासन स्तर से इस पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई अपने घर की जरूरत के लिए गंगा से रेत आदि लेना चाहता है तो डीएम से अनुमति लेकर ले सकता है।

उनके और स्वामी आत्मबोधानंद के अनशन समाप्ति की बाबत उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में मुख्यमंत्री हरीश रावत मातृसदन आएंगे उसके बाद ही अनशन पर निर्णय होगा। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि अधिकारी मातृसदन के संतों का पक्ष जानने-समझने के लिए आए हैं।

मातृसदन की ओर से कई वैैैज्ञानिक तथ्य रखे गए हैं। बताया गया कि रायवाला से भोगपुर तक गंगा में बोल्डर नहीं आते, इसलिए यहां खनन करने का औचित्य नहीं है। खनन नहीं होने से बाढ़ का खतरा बताया जाता है, उसके लिए तटबंध मजबूत करने का सुझाव रखा गया है।


उन्होंने कहा कि गंगा में खनन पर पहले रोक लगाई जा चुकी है। अभी यह जारी रहेगी। यह पूरा मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री के स्तर से इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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