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इतने बुरे हालात, कैसे सुधरेगा शिक्षा और स्वास्थ्य

Sat, 21 May 2022 08:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 08:24 PM IST
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Such bad conditions, how will education and health improve
बच्चे देश का भविष्य हैं। बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकारी दावे जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं। जिले के आंगनबाड़ी केंद्र इसके उदाहरण हैं। कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों के पास भवन नहीं हैं तो कहीं बिजली-पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घरों और सरकारी जर्जर भवनों में चलने वाले केंद्रों के खुलने और बंद होने का कोई समय तय नहीं है। कार्यकर्ताओं की मनमर्जी से खुलते और बंद होते हैं। बाल विकास विभाग आंखें मूंदे हैं। इसी वजह है कि केंद्रों की हालात बेहद ही खराब हैं। अभिभावक भी बच्चों को सिर्फ पोषाहार के लिए केंद्रों पर भेजते हैं। बाकी दिनों में बच्चों की उपस्थिति गिनती की रहती है। अमर उजाला ने शनिवार को कई आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की। पड़ताल में केंद्रों के दावों की पोल खुल गई।
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कहीं नौ बच्चे मिले तो कहीं सहायिका गायब
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जमालपुर कलां स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या एक, पांच और दो खुले मिले। हालांकि, केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों की संख्या के सापेक्ष उपस्थिति काफी कम थी। केंद्र संख्या एक पर पंजीकृत 25 बच्चों में से मात्र नौ बच्चे आए थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा रानी ने बताया कि केंद्र पर सहायिका नहीं है। बच्चों को घरों से लाने में परेशानी होती है। केंद्र संख्या पांच और दो एक ही जगह चलते मिले। केंद्र संख्या दो की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्नेहलता मौके पर नहीं मिली। हालांकि, बाद में पहुंच गई। उन्होंने बताया कि एक बच्चे को केंद्र पर आते हुए चोट लग गई थी। इसलिए उसके घर गई थी। दोनों केंद्रों पर 45 बच्चे पंजीकृत हैं लेकिन उपस्थिति मात्र 20 बच्चों की थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेणू ने बताया कि बच्चे आते और जाते रहते हैं।
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घरों से बच्चे लाते पानी और गर्मी में हैं झुलसते
क्षेत्र में सात आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। छह केंद्रों के पास अपने भवन हैं, जबकि एक केंद्र किराये के भवन पर चलता है। केंद्रों पर बच्चों के लिए पीने के पानी, बिजली, शौचालय जैसे बेसिक सुविधाएं नहीं हैं। गर्मी में बच्चे बेहाल हो रहे हैं। बच्चे पीने के लिए पानी घरों से लेकर आते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-दो तक आने जाने का रास्ता ही बेहद खराब है। रास्ते पर गंदा पानी भरा रहता है।
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कार्यकर्ताओं के घरों में चल रहे केंद्र
गांव शेरपुर में दो आंगनबाड़ी सेंटर हैं, लेकिन उनके लिए भवन नहीं हैं। गांव टिकौला में चार और हरसीवाला में दो आंगनबाड़ी सेंटर हैं और इनके भवन भी नहीं हैं। कार्यकर्ता अपने घरों पर ही आंगनबाड़ी सेंटर चलाने को मजबूर है। गांव भट्टीपुर में दो आंगनबाड़ी में एक घर में चलता है। टिकौला की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता, सपना, पिंकी व बबीता और हरसीवाला की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शशि रानी और ममतेश देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के भवन नहीं होने से घरों पर ही सेंटर चला रही हैं। गांव धारीवाला की आंगनबाड़ी कार्यकत्री सीमा, मीनू और बाला देवी ने बताया कि बगैर भवन के घरों पर सेंटर चला रही हैं। गांव शाहपुर शीतलाखेड़ा में चार आंगनबाड़ी सेंटरों में मात्र एक के पास भवन है। शाहपुर शीतलाखेड़ा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सविता, प्रीति व मीरा देवी ने बताया कि बगैर भवन कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है।
लालढांग क्षेत्र में बंद मिले केंद्र
क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिले। पूछताछ करने पर अभिभावकों ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हरिद्वार में बैठक है। सभी बैठक में गई हैं। अभिभावकों ने बताया कि अक्सर केंद्र बंद ही रहते हैं।
इसलिए संचालित होते हैं आंगनबाड़ी केंद्र
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को स्कूल से पहले का अक्षर ज्ञान सिखाया जाता है। कार्यकर्ताओं की ओर से बच्चों को उनके माता-पिता का नाम, गांव शहर, जिला आदि की बेसिक शिक्षा दी जाती है। ताकि वह कहीं भी अपनी और अपने घर और परिजनों की जानकारी दे सकें। फल, सब्जियां समेत अन्य प्रमुख चीजों की पहचान कराई जाती है। गिनती, अक्षर ज्ञान आदि के बारे में बताया जाता है। जिससे वह स्कूलों में जाते ही आगे की पढ़ाई शुरू कर सकें। इसके अलावा बच्चों को पोषाहार दिया जाता है, ताकि वह स्वस्थ रह सकें।
बहादराबाद के आठों केंद्र घर से संचालित
मीरपुर में आंगनबाड़ी केंद्र नंबर दो के भवन की स्थिति दयनीय है। भवन के चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हैं। गोबर भी आंगनबाड़ी केंद्र के सामने डाला है। आंगनबाड़ी भवन का निर्माण 2003 में हुआ, लेकिन 2017 में केंद्र की दीवार टूट गई। बीते पांच सालों से कार्यकर्ता बच्चों को अपने घर पर पढ़ाती हैं। मीरपुर गांव में आंगनबाड़ी के सात केंद्र हैं। सातों केंद्र घरों में ही चल रहे हैं। पूर्व प्रधान रीता सैनी ने बताया की आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण के लिए ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव पारित कर भूमि उपलब्ध कराई है। लेकिन पैसा नहीं आने से आंगनबाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण नहीं कराया जा सका है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। यदि नहीं हैं तो इस मामले में संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। घरों या सरकारी भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में किसी तरह की लापरवाही बरदाश्त नहीं की जाएगी। केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा।
- विनय शंकर पांडेय, डीएम हरिद्वार
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