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रिकवरी पर शासन सख्त
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:05 PM IST
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फर्जीवाड़े में बर्खास्त शिक्षकों से वेतन भत्तों की रिकवरी में विभाग के ढुलमुल रवैये का शासन ने संज्ञान लिया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने रिकवरी में तेजी लाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही जिन 10 नए शिक्षकों के नाम फर्जीवाड़े में सामने आए हैं, उनके दस्तावेज जुटाने को भी कहा गया है। नए डीईओ बेसिक को इस बाबत चिट्ठी भेजी गई है।
जनपद में प्राइमरी शिक्षकों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद प्रकरण में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। साथ ही विभागीय शिथिलता भी लगातार सामने आ रही है। तत्कालीन डीईओ बेसिक रामेंद्र कुशवाहा ने जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद 12 शिक्षकों को बर्खास्त किया था। ये सभी शिक्षक वर्ष 1992 से लेकर 2002 के बीच भर्ती हुए थे। लिहाजा पुलिस को मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर देते हुए खंड स्तर पर वेतन भत्तों की रिकवरी के निर्देश भी खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए जा चुके हैं। साथ ही दस्तावेज न दिखाने पर निलंबित शिक्षकों की जांच भी खंड अधिकारियों को दी गई है। मगर अभी तक किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी दफ्तर ने रिकवरी की औपचारिकताएं पूरी नहीं की है। जबकि निलंबित शिक्षकों की जांच सिर्फ लक्सर ब्लॉक ही पूरी कर पाया है। ऐसे सुस्त रवैये की चर्चाएं शासन तक भी पहुंच रही हैं। प्राइमरी शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए रिकवरी में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन नए शिक्षकों के नाम फर्जीवाड़े से जुड़ रहे हैं, उनके दस्तावेज जुटाकर जांच के लिए इलाहाबाद भेजे जाएं।
नए शिक्षकों के दस्तावेजों का हुआ सत्यापन
शिक्षकों के इतने बड़े पैमाने पर बीटीसी की मार्कशीट व डोमिसाइल फर्जी पाए जाने का भले ही यह प्रदेश का पहला मामला है, अलबत्ता ऐसे इक्का दुक्का मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे तमाम प्रकरणों से सबक लेते हुए विभाग ने पिछले दिनों भर्ती हुए सहायक अध्यापकों के प्रमाण पत्रों का पहले ही सत्यापन करा लिया है। ताकी बाद में फजीहत न झेलनी पड़ी। खुद प्राथमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नए शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा चुका है, पुराने जिन शिक्षकों के नाम सामने आ रहे हैं उनकी जांच कराते हुए अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में प्राइमरी शिक्षकों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद प्रकरण में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। साथ ही विभागीय शिथिलता भी लगातार सामने आ रही है। तत्कालीन डीईओ बेसिक रामेंद्र कुशवाहा ने जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद 12 शिक्षकों को बर्खास्त किया था। ये सभी शिक्षक वर्ष 1992 से लेकर 2002 के बीच भर्ती हुए थे। लिहाजा पुलिस को मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर देते हुए खंड स्तर पर वेतन भत्तों की रिकवरी के निर्देश भी खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए जा चुके हैं। साथ ही दस्तावेज न दिखाने पर निलंबित शिक्षकों की जांच भी खंड अधिकारियों को दी गई है। मगर अभी तक किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी दफ्तर ने रिकवरी की औपचारिकताएं पूरी नहीं की है। जबकि निलंबित शिक्षकों की जांच सिर्फ लक्सर ब्लॉक ही पूरी कर पाया है। ऐसे सुस्त रवैये की चर्चाएं शासन तक भी पहुंच रही हैं। प्राइमरी शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए रिकवरी में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन नए शिक्षकों के नाम फर्जीवाड़े से जुड़ रहे हैं, उनके दस्तावेज जुटाकर जांच के लिए इलाहाबाद भेजे जाएं।
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नए शिक्षकों के दस्तावेजों का हुआ सत्यापन
शिक्षकों के इतने बड़े पैमाने पर बीटीसी की मार्कशीट व डोमिसाइल फर्जी पाए जाने का भले ही यह प्रदेश का पहला मामला है, अलबत्ता ऐसे इक्का दुक्का मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे तमाम प्रकरणों से सबक लेते हुए विभाग ने पिछले दिनों भर्ती हुए सहायक अध्यापकों के प्रमाण पत्रों का पहले ही सत्यापन करा लिया है। ताकी बाद में फजीहत न झेलनी पड़ी। खुद प्राथमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नए शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा चुका है, पुराने जिन शिक्षकों के नाम सामने आ रहे हैं उनकी जांच कराते हुए अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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