{"_id":"62865a0b6e42826aab49f77e","slug":"straw-reached-close-to-the-government-rate-of-wheat-haridwar-news-drn4121749181","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोशालाओं के स्टोर खाली, मवेशियों के लिए चारे का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोशालाओं के स्टोर खाली, मवेशियों के लिए चारे का संकट
विज्ञापन
बहारी राज्यों से भूसा कम आने के कारण पशुपालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। सीजन में ही भूसा 1400 रुपये क्विंटल बिक रहा है। जबकि अभी सरकारी क्रय केंद्रों पर ही किसानों ने अपना गेहूं 2050 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचा। इस तरह से भूसे और गेहूं के रेट के बीच कोई खास अंतर नहीं रह गया। आशंका जताई जा रही है कि बरसात और सर्दी के मौसम में भूसा के दाम गेहूं के दाम को भी पीछे छोड़ देगा।
शहर और देहात क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़े हैं। हरिद्वार में कई आश्रम, अखाड़ों और संस्थाओं की भी गोशालाएं हैं। हरिद्वार में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों से भूसा आता रहा है। इस बार बाहरी राज्यों में गेहूं का रकबा कम होने से भूसे का संकट खड़ा हो गया। हरियाणा सरकार की ओर से भूसे की बाहरी राज्यों के लिए बिक्री पर रोक लगाई है। जिससे हरियाणा से भूसा आना बंद हो गया है। अब हालत है पशुपालक अपने खेतों से निकले भूसे से कुछ महीनों तक मवेशियों को चारा खिला लेंगे, लेकिन गोशालाओं के भूसा गोदाम खाली हो गए हैं।
स्थानीय भूसा स्टोरों से भी पर्याप्त मात्रा में भूसा नहीं है। भूसे की कमी और मांग अधिक होने के साथ ही दाम भी बढ़ने से परेशानी आ रही है। संतोषी माता आश्रम गऊशाला के संचालक अशोक शांडिल्य ने बताया कि भूसे की बेहद किल्लत खड़ी हो गई है।
विज्ञापन
एक तरफ गौ संरक्षण की बात की जाती है। दूसरी तरफ भूसे की किल्लत को दूर करने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। हरिद्वार जिले में हर तरफ भूसे का संकट है।
- प्रदीप चौधरी, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष
जिस तरह से भूसे का संकट हो रहा है उससे बड़ी समस्या हो सकती है। सरकार को भूसा का उपयोग फैक्टरी और अन्य व्यावसायिक कार्यों में रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।
- रामकुमार मिश्रा, श्मशान विकास समिति कनखल
भूसे की मांग अधिक है। मांग के सापेक्ष भूसा नहीं मिल पा रहा है। 40 फीसदी भूसा पंजाब, यूपी से बड़ी मुश्किल से आ रहा है। दाम भी 1350 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पशु पालकों के साथ ही भूसा स्टोर संचालक भी इस समस्या से परेशान हैं।
- फुरकान अहमद, भूसा स्टोर संचालक
भूसे की किल्लत को लेकर जिलाधिकारी के समक्ष बैठक में बात रखी गई थी। पशु चिकित्साधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। इस संबंध में जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
- अवधेश कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
विज्ञापन
शहर और देहात क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़े हैं। हरिद्वार में कई आश्रम, अखाड़ों और संस्थाओं की भी गोशालाएं हैं। हरिद्वार में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों से भूसा आता रहा है। इस बार बाहरी राज्यों में गेहूं का रकबा कम होने से भूसे का संकट खड़ा हो गया। हरियाणा सरकार की ओर से भूसे की बाहरी राज्यों के लिए बिक्री पर रोक लगाई है। जिससे हरियाणा से भूसा आना बंद हो गया है। अब हालत है पशुपालक अपने खेतों से निकले भूसे से कुछ महीनों तक मवेशियों को चारा खिला लेंगे, लेकिन गोशालाओं के भूसा गोदाम खाली हो गए हैं।
विज्ञापन
स्थानीय भूसा स्टोरों से भी पर्याप्त मात्रा में भूसा नहीं है। भूसे की कमी और मांग अधिक होने के साथ ही दाम भी बढ़ने से परेशानी आ रही है। संतोषी माता आश्रम गऊशाला के संचालक अशोक शांडिल्य ने बताया कि भूसे की बेहद किल्लत खड़ी हो गई है।
विज्ञापन
एक तरफ गौ संरक्षण की बात की जाती है। दूसरी तरफ भूसे की किल्लत को दूर करने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। हरिद्वार जिले में हर तरफ भूसे का संकट है।
- प्रदीप चौधरी, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष
जिस तरह से भूसे का संकट हो रहा है उससे बड़ी समस्या हो सकती है। सरकार को भूसा का उपयोग फैक्टरी और अन्य व्यावसायिक कार्यों में रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।
- रामकुमार मिश्रा, श्मशान विकास समिति कनखल
भूसे की मांग अधिक है। मांग के सापेक्ष भूसा नहीं मिल पा रहा है। 40 फीसदी भूसा पंजाब, यूपी से बड़ी मुश्किल से आ रहा है। दाम भी 1350 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पशु पालकों के साथ ही भूसा स्टोर संचालक भी इस समस्या से परेशान हैं।
- फुरकान अहमद, भूसा स्टोर संचालक
भूसे की किल्लत को लेकर जिलाधिकारी के समक्ष बैठक में बात रखी गई थी। पशु चिकित्साधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। इस संबंध में जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
- अवधेश कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट