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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Somwati moon dip in the Ganges caused by the millions

गंगा में डुबकी

Mon, 04 Jul 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार Updated Mon, 04 Jul 2016 11:56 PM IST
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हरिद्वार। मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाली सोमवती अमावस्या पर देश के विभिन्न भागों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। कुशावर्त और नारायणी शिला जाकर श्राद्घ-तर्पण और पितृ कर्म संपन्न कराए। सोमवार को तड़के से ही गंगा घाटों पर लगी भीड़ तीसरे पहर तक चलती रही।

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हजारों महिलाओं ने स्नानोंपरांत सूत के धागे लपेटते हुए पीपल के वृक्षों की 108 परिक्रमाएं की। जहां-जहां भी पीपल के वृक्ष थे, उन सभी स्नानों पर महिलाओं की भीड़ दिन भर लगी रही। परिक्रमा के बाद यात्रियों ने पुरोहितों की गद्दियों पर जाकर दान-पुण्य किया। अनेक श्रद्घालुओं ने इस अमावस्या को पितृ कर्म के लिए चुना। नारायणी शिला पर जहां भीड़ रही, वहीं कुशावर्त पर भी तिल रखने की जगह नहीं थी।
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सोमवती पर आने वाले यात्रियों में सर्वाधिक भीड़ पंजाब और जम्मू कश्मीर से की थी। राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल से भी खासी संख्या में श्रद्घालु गंगा नहाने पहुंचे। दोपहर के समय हरकी पैड़ी पर मां गंगा को सामूहिक भोग लगाया गया। नगर के अनेक मठों, आश्रमों और अखाड़ों में सोमवती भोज आयोजित किए गए।
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चरमराई हरकी पैड़ी की व्यवस्था
हरिद्वार। सवेरे के समय भारी भीड़ एक साथ हरकी पैडी पहुंचने पर व्यवस्था चरमरा गई। दस बजे तक गंगा सभा का एक भी पदाधिकारी हरकी पैड़ी नहीं पहुंचा। गंदगी का आलम यह था कि यात्री फिसल कर गिर रहे थे। बारिश होने के बाद तो हालात और भी बिगड़ गए। सभा के कर्मचारी यात्रियों को जूते पहने हुए हरकी पैड़ी जाने दे रहे थे। भीड़ इस कदर थी कि कोई भी प्रबंध सफल नहीं हो पाया।

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शुक्रास्त होने के कारण कम हुए उद्यापन
हरिद्वार। तारा डूबा हुआ हो तो उद्यापन कम होते हैं। डूबा हुआ शुक्र आठ जुलाई को उदित होगा। परिणाम स्वरूप सोमवती पर सैकड़ों स्थानों पर होने वाले उद्यापन बहुत कम हुए। इस वर्ष चूंकि अन्य कोई सोमवती नहीं है, अत: उद्यापन अगले वर्ष की सोमवती पर होंगे।

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