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12 घंटे पहले लग गया सूर्य ग्रहण का सूतक
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- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार। कंकण सूर्य ग्रहण के बृृहस्पतिवार को पड़ने के कारण ग्रहण का सूतक बुधवार की रात आठ बजे प्रारंभ हो गया। सूतक से पहले ही धर्मनगरी में सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। मंदिरों और हर की पैड़ी पर सवेरे होने वाली पूजा तथा आरती बृहस्पतिवार को नहीं होंगी। मंदिरों के कपाट अब तभी खुलेंगे, जब ग्रहण पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा।
ग्रहण सवेरे आठ बजे से शुरू होगा तथा दोहपर 1.36 बजे तक कहीं न कहीं दिखाई देता रहेगा। ग्रहण का खंडग्रास कंकण स्वरूप प्रात: 9.33 बजे पूूर्ण रूप से नजर आएगा। अगर आकाश में कोहरा या बादल न हुए तो कंकण सूर्य ग्रह के समय सूर्य का प्रकाश 80 प्रतिशत समाप्त हो जाएगा। ऐसा होने पर दिन में ही अंधेरे का आभास होगा। सूर्य ग्रहण पूर्ण संपन्न हो जाने के बाद हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं का स्नान प्रारंभ हो जाएगा। इसके पश्चात सभी मंदिरों की धुलाई की जाएगी, तथा मंदिरों की देव प्रतिमाओं को नये वस्त्र पहनाए जाएंगे।
पंड़ित अमित शास्त्री के अनुसार शास्त्रीय दृष्टि से ग्रहण के समय किसी भी प्रकार का अन्न अथवा पेय नहीं लेना चाहिए। शास्त्रों में ग्रहण के समय भोजन पूर्ण रूप से निषेध किया गया है। अनेक धर्मावलंबियों ने रात से ही कोई भी पदार्थ ग्रहण नहीं किया। ग्रहण स्नान के लिए श्रद्धालुओं का आगमन जारी है।
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ग्रहण सवेरे आठ बजे से शुरू होगा तथा दोहपर 1.36 बजे तक कहीं न कहीं दिखाई देता रहेगा। ग्रहण का खंडग्रास कंकण स्वरूप प्रात: 9.33 बजे पूूर्ण रूप से नजर आएगा। अगर आकाश में कोहरा या बादल न हुए तो कंकण सूर्य ग्रह के समय सूर्य का प्रकाश 80 प्रतिशत समाप्त हो जाएगा। ऐसा होने पर दिन में ही अंधेरे का आभास होगा। सूर्य ग्रहण पूर्ण संपन्न हो जाने के बाद हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं का स्नान प्रारंभ हो जाएगा। इसके पश्चात सभी मंदिरों की धुलाई की जाएगी, तथा मंदिरों की देव प्रतिमाओं को नये वस्त्र पहनाए जाएंगे।
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पंड़ित अमित शास्त्री के अनुसार शास्त्रीय दृष्टि से ग्रहण के समय किसी भी प्रकार का अन्न अथवा पेय नहीं लेना चाहिए। शास्त्रों में ग्रहण के समय भोजन पूर्ण रूप से निषेध किया गया है। अनेक धर्मावलंबियों ने रात से ही कोई भी पदार्थ ग्रहण नहीं किया। ग्रहण स्नान के लिए श्रद्धालुओं का आगमन जारी है।
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