{"_id":"6181857db665a86bbb5829dc","slug":"shrestha-scheme-of-poor-meritorious-dying-in-low-budget-haridwar-news-drn3951606106","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम बजट में दम तोड़ रही गरीब मेधावियों की योजना श्रेष्ठा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम बजट में दम तोड़ रही गरीब मेधावियों की योजना श्रेष्ठा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनुसूचित जाति के गरीब मेधावी बच्चों को सीबीएसई पैटर्न के आवासीय विद्यालय में पढ़ाने की योजना को पंख नहीं लग पा रहे हैं। चयन होने के बाद भी कक्षा नौ और ग्यारह के 31 बच्चों को आज तक प्रवेश नहीं दिलाया जा सका है। विभाग की ओर से तय बजट में कोई भी आवासीय स्कूल बच्चों के प्रवेश कराने को तैयार नहीं है।
नीति आयोग की ओर से जनपद हरिद्वार के अनुसूचित जाति के गरीब मेधावी बच्चों के लिए श्रेष्ठा योजना शुरू की गई है। योजना के तहत कक्षा नौ में 14 और कक्षा 11 में 17 बच्चों को सीबीएसई पैटर्न के किसी निजी आवासी विद्यालय में प्रवेश दिलाना है। इन सभी 31 बच्चों को कक्षा 12 तक रहने, खाने, किताब और स्कूल फीस आदि सभी का खर्च योजना से उठाया जाना है।
अगस्त में बच्चों का परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन भी कर लिया गया था। पहले शिक्षा विभाग ने चयनित बच्चों का प्रवेश रुड़की तहसील के लंढौरा के शिकारपुर स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में दिलाने की तैयारी की थी। लेकिन नीति आयोग ने नवोदय विद्यालय में प्रवेश कराने की अनुमति नहीं दी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग ने पहले हरिद्वार में ही सीबीएसई पैटर्न से संचालित आवासीय विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश करवाने की कोशिश की, लेकिन यहां ऐसा कोई स्कूल नहीं मिला जहां छात्र-छात्राएं दोनों के लिए आवासीय सुविधा हो। इसके बाद अधिकारियों ने ऋषिकेश के एक निजी आवासीय स्कूल में प्रवेश कराने के लिए पूछताछ कि तो वहां की फीस ढाई से तीन लाख बताई गई। ऐसे में अधिकारी अभी तक बच्चों का प्रवेश नहीं करा पाए हैं।
प्रवेश को 45 लाख की बजट की और दरकार
दरअसल, नीति आयोग की ओर से कक्षा नौ के एक बच्चे के लिए 75 हजार और 11 के लिए एक लाख 25 हजार रुपये का सालाना खर्च निर्धारित किया है। जिससे विभाग को 31 लाख 75 हजार रुपये में बच्चों को आवासीय विद्यालय में पढ़ाने का प्रति वर्ष का खर्च दिया गया है, जबकि निजी आवासीय विद्यालयों की ओर से ढाई से तीन लाख रुपये प्रति छात्र शुल्क की मांग की जा रही है। इस हिसाब से बच्चों को सालभर पढ़ाने के लिए कुल 76 लाख 75 हजार रुपये के बजट बनता है। जिससे बच्चों का आवासीय स्कूल में प्रवेश कराने के लिए करीब 45 लाख रुपये के बजट की और आवश्यकता पड़ रही है। मगर बजट देने से नीति आयोग ने मानकों को हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं।
ऊधमसिंह नगर स्थित एक निजी आवासीय स्कूल नीति आयोग से मिले बजट के आधार पर प्रवेश के लिए राजी हो गया है। जिसकी अनुमति के लिए जिलाधिकारी को फाइल भेजी गई है। जिलाधिकारी की अनुमति मिलते ही बच्चों को आवासीय स्कूल में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही संबंधित स्कूल में बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराने के लिए प्रवेश दिला दिया जाएगा।
- डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार
विज्ञापन
नीति आयोग की ओर से जनपद हरिद्वार के अनुसूचित जाति के गरीब मेधावी बच्चों के लिए श्रेष्ठा योजना शुरू की गई है। योजना के तहत कक्षा नौ में 14 और कक्षा 11 में 17 बच्चों को सीबीएसई पैटर्न के किसी निजी आवासी विद्यालय में प्रवेश दिलाना है। इन सभी 31 बच्चों को कक्षा 12 तक रहने, खाने, किताब और स्कूल फीस आदि सभी का खर्च योजना से उठाया जाना है।
विज्ञापन
अगस्त में बच्चों का परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन भी कर लिया गया था। पहले शिक्षा विभाग ने चयनित बच्चों का प्रवेश रुड़की तहसील के लंढौरा के शिकारपुर स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में दिलाने की तैयारी की थी। लेकिन नीति आयोग ने नवोदय विद्यालय में प्रवेश कराने की अनुमति नहीं दी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग ने पहले हरिद्वार में ही सीबीएसई पैटर्न से संचालित आवासीय विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश करवाने की कोशिश की, लेकिन यहां ऐसा कोई स्कूल नहीं मिला जहां छात्र-छात्राएं दोनों के लिए आवासीय सुविधा हो। इसके बाद अधिकारियों ने ऋषिकेश के एक निजी आवासीय स्कूल में प्रवेश कराने के लिए पूछताछ कि तो वहां की फीस ढाई से तीन लाख बताई गई। ऐसे में अधिकारी अभी तक बच्चों का प्रवेश नहीं करा पाए हैं।
प्रवेश को 45 लाख की बजट की और दरकार
दरअसल, नीति आयोग की ओर से कक्षा नौ के एक बच्चे के लिए 75 हजार और 11 के लिए एक लाख 25 हजार रुपये का सालाना खर्च निर्धारित किया है। जिससे विभाग को 31 लाख 75 हजार रुपये में बच्चों को आवासीय विद्यालय में पढ़ाने का प्रति वर्ष का खर्च दिया गया है, जबकि निजी आवासीय विद्यालयों की ओर से ढाई से तीन लाख रुपये प्रति छात्र शुल्क की मांग की जा रही है। इस हिसाब से बच्चों को सालभर पढ़ाने के लिए कुल 76 लाख 75 हजार रुपये के बजट बनता है। जिससे बच्चों का आवासीय स्कूल में प्रवेश कराने के लिए करीब 45 लाख रुपये के बजट की और आवश्यकता पड़ रही है। मगर बजट देने से नीति आयोग ने मानकों को हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं।
ऊधमसिंह नगर स्थित एक निजी आवासीय स्कूल नीति आयोग से मिले बजट के आधार पर प्रवेश के लिए राजी हो गया है। जिसकी अनुमति के लिए जिलाधिकारी को फाइल भेजी गई है। जिलाधिकारी की अनुमति मिलते ही बच्चों को आवासीय स्कूल में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही संबंधित स्कूल में बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराने के लिए प्रवेश दिला दिया जाएगा।
- डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार