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Haridwar News: गुरुकुल कांगड़ी विवि में श्रद्धानंद की जयंती मनाई
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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में स्वामी श्रद्धानंद महाराज की 171वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उन्हें नवजागरण का पुरोधा बताते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, पूर्व कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों और आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए समाज को नई दिशा दी। उन्होंने नारी शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, प्राचीन वैदिक शिक्षा के पुनरुत्थान तथा सामाजिक भेदभाव मिटाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली विदेशी शिक्षा पद्धति की अपेक्षा अधिक श्रेष्ठ, संस्कारयुक्त और जीवनोपयोगी है। इसका कोई विकल्प नहीं है। कहा कि भारत सरकार भी भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुलीय प्रणाली को प्रोत्साहित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वामी श्रद्धानंद के जीवन और विचारों का गहन अध्ययन करें तथा उनके आदर्शों पर चलकर राष्ट्र और समाज को उन्नति के पथ पर अग्रसर करें। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा। इस दौरान शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. हिमांशु पंडित ने किया। डॉ. दीनदयाल ने आभार जताया।
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मुख्य वक्ता प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, पूर्व कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों और आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए समाज को नई दिशा दी। उन्होंने नारी शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, प्राचीन वैदिक शिक्षा के पुनरुत्थान तथा सामाजिक भेदभाव मिटाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
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विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली विदेशी शिक्षा पद्धति की अपेक्षा अधिक श्रेष्ठ, संस्कारयुक्त और जीवनोपयोगी है। इसका कोई विकल्प नहीं है। कहा कि भारत सरकार भी भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुलीय प्रणाली को प्रोत्साहित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वामी श्रद्धानंद के जीवन और विचारों का गहन अध्ययन करें तथा उनके आदर्शों पर चलकर राष्ट्र और समाज को उन्नति के पथ पर अग्रसर करें। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा। इस दौरान शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. हिमांशु पंडित ने किया। डॉ. दीनदयाल ने आभार जताया।
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