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श्रेष्ठा योजना: ऊधमसिंह नगर नहीं जाना चाहते हैं बच्चे
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अनुसूचित जाति के गरीब मेधावी बच्चों को निर्धारित बजट से सीबीएसई पैटर्न के आवासीय विद्यालय में पढ़ाने की योजना को पंख लगाने के लिए पहले हरिद्वार और ऋषिकेश में स्कूल ही नहीं मिला। अब ऊधमसिंह नगर का एक स्कूल तैयार हुआ है तो उसमें दाखिले के लिए अभिभावक राजी नहीं हो रहे हैं। चयनित बच्चों में से अब तक केवल आठ ने ही दाखिला लिया है। इन हालात में शिक्षा विभाग की योजना परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही है।
नीति आयोग की ओर से हरिद्वार के अनुसूचित जाति के मेधावी बच्चों के लिए श्रेष्ठा योजना शुरू की गई है। योजना के तहत कक्षा नौ में 14 और कक्षा 11 में 17 बच्चों को सीबीएसई पैटर्न के किसी निजी आवासी विद्यालय में प्रवेश दिलाना है। कुल मिलाकर 31 बच्चों को कक्षा 12 तक रहने, खाने, किताब और स्कूल फीस आदि का खर्च योजना से उठाया जाएगा। अगस्त में बच्चों का परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन भी कर लिया गया था। शिक्षा विभाग ने चयनित बच्चों का प्रवेश रुड़की तहसील के लंढौरा के शिकारपुर स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में दिलाने की तैयारी की थी। इसकी नीति आयोग ने अनुमति नहीं दी। बाद में हरिद्वार में ही सीबीएसई पैटर्न से संचालित आवासीय विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश करवाने की कोशिश की गई लेकिन ऐसा कोई स्कूल नहीं मिला जहां छात्र-छात्राओं दोनों के लिए आवासीय सुविधा हो। इसके बाद अधिकारियों ने ऋषिकेश के एक निजी आवासीय स्कूल में प्रवेश कराने की योजना बनाई लेकिन वहां बजट कम पड़ गया।
अब जब ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर के पास स्थित भारतीय इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल रामेश्वरपुर सरकार की ओर से जारी बजट में बच्चों को आवासीय शिक्षा देने के लिए राजी हो गया है तो परिजन प्रवेश दिलाने से कन्नी काट रहे हैं। जिला संदर्भ व्यक्ति समग्र शिक्षा हरिद्वार डॉ. संतोष कुमार चमोला ने बताया कि कक्षा नौ की 14 सीटों में से आठ पर दाखिला हुआ है। कक्षा 11 की सीटें खाली पड़ी हुई हैं। संवाद
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कोट:
ऊधमसिंह नगर स्थित एक निजी आवासीय स्कूल में जिन अभिभावकों ने सहमति जता दी थी उन्हें प्रवेश दिला दिया गया है। स्कूल दूर होने के कारण अभिभावक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। और भी बच्चे प्रवेश लेना चाहेंगे तो उनके अभिभावकों की अनुमति के बाद प्रवेश दिला दिया जाएगा। - डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार
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नीति आयोग की ओर से हरिद्वार के अनुसूचित जाति के मेधावी बच्चों के लिए श्रेष्ठा योजना शुरू की गई है। योजना के तहत कक्षा नौ में 14 और कक्षा 11 में 17 बच्चों को सीबीएसई पैटर्न के किसी निजी आवासी विद्यालय में प्रवेश दिलाना है। कुल मिलाकर 31 बच्चों को कक्षा 12 तक रहने, खाने, किताब और स्कूल फीस आदि का खर्च योजना से उठाया जाएगा। अगस्त में बच्चों का परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन भी कर लिया गया था। शिक्षा विभाग ने चयनित बच्चों का प्रवेश रुड़की तहसील के लंढौरा के शिकारपुर स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में दिलाने की तैयारी की थी। इसकी नीति आयोग ने अनुमति नहीं दी। बाद में हरिद्वार में ही सीबीएसई पैटर्न से संचालित आवासीय विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश करवाने की कोशिश की गई लेकिन ऐसा कोई स्कूल नहीं मिला जहां छात्र-छात्राओं दोनों के लिए आवासीय सुविधा हो। इसके बाद अधिकारियों ने ऋषिकेश के एक निजी आवासीय स्कूल में प्रवेश कराने की योजना बनाई लेकिन वहां बजट कम पड़ गया।
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अब जब ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर के पास स्थित भारतीय इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल रामेश्वरपुर सरकार की ओर से जारी बजट में बच्चों को आवासीय शिक्षा देने के लिए राजी हो गया है तो परिजन प्रवेश दिलाने से कन्नी काट रहे हैं। जिला संदर्भ व्यक्ति समग्र शिक्षा हरिद्वार डॉ. संतोष कुमार चमोला ने बताया कि कक्षा नौ की 14 सीटों में से आठ पर दाखिला हुआ है। कक्षा 11 की सीटें खाली पड़ी हुई हैं। संवाद
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कोट:
ऊधमसिंह नगर स्थित एक निजी आवासीय स्कूल में जिन अभिभावकों ने सहमति जता दी थी उन्हें प्रवेश दिला दिया गया है। स्कूल दूर होने के कारण अभिभावक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। और भी बच्चे प्रवेश लेना चाहेंगे तो उनके अभिभावकों की अनुमति के बाद प्रवेश दिला दिया जाएगा। - डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार