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Haridwar News: मरने के बाद भी दुनिया देखेंगी संतोष शर्मा
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Iमुस्कान फाउंडेशन दो नेत्रहीनों के जीवन का दूर करेगा अंधेरा
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Iयदि किसी नेत्रहीन के जीवन का अंधकार दूर हो जाए तो इससे अधिक पुण्य का कार्य कुछ नहीं हो सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए शिवालिक नगर निवासी संतोष शर्मा के परिजनों ने उनके मरणोपरांत उनकी आंखें दान कर दीं। नेत्र बैंक हिमालयन हॉस्पिटल, जौलीग्रांट से आई चिकित्सकों की टीम ने नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण कराया।
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Iपरिजनों के अनुसार, वर्ष 2014 में संतोष के पति का भी मरने के बाद नेत्रदान किया गया था। चार फरवरी को शिवालिक नगर निवासी संतोष के निधन के बाद नेत्रों का दान किया गया। परिजनों के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन काल में ही आंखें दान करने का संकल्प लिया था।
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Iउनका मानना था कि अगर कोई व्यक्ति मरने के बाद अपनी आंखें दान कर किसी अंधे आदमी के जीवन का अंधेरा दूर करता है, तो इससे बड़ा और पुण्य कार्य कोई नहीं है। इसी के चलते परिजनों ने संतोष के जीवन की इस इच्छा को पूरा किया।
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Iमुस्कान फाउंडेशन की अध्यक्ष नेहा मालिक ने बताया, चार फरवरी को संतोष शर्मा के स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र दिव्यांश ने मुस्कान फाउंडेशन की मदद से उनके नेत्रदान कराने की इच्छा को पूर्ण कराकर सराहनीय कार्य किया।
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Iसंतोष शर्मा के स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र दिव्यांश शर्मा ने नेहा मलिक से अपनी माता का नेत्रदान कराने के लिए संपर्क किया तो नेहा ने नेत्र बैंक हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट की चिकित्सक डॉ. नीलम वर्मा को सूचित किया।
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Iइसके बाद उनकी टीम में शामिल डॉ. सिमरन, डॉ. अनुज, डॉ. स्नेही आदि ने संतोष शर्मा के आवास पर पहुंचे और नेत्रदान करने की प्रक्रिया पूरी कराई। दिव्यांश ने बताया, वर्ष 2014 में उनके पिता धर्मपाल शर्मा के स्वर्गवास के बाद भी उन्होंने अपने पिता के नेत्रों का दान किया था।I
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Iमुस्कान फाउंडेशन दो नेत्रहीनों के जीवन का दूर करेगा अंधेरा
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Iयदि किसी नेत्रहीन के जीवन का अंधकार दूर हो जाए तो इससे अधिक पुण्य का कार्य कुछ नहीं हो सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए शिवालिक नगर निवासी संतोष शर्मा के परिजनों ने उनके मरणोपरांत उनकी आंखें दान कर दीं। नेत्र बैंक हिमालयन हॉस्पिटल, जौलीग्रांट से आई चिकित्सकों की टीम ने नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण कराया।
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Iपरिजनों के अनुसार, वर्ष 2014 में संतोष के पति का भी मरने के बाद नेत्रदान किया गया था। चार फरवरी को शिवालिक नगर निवासी संतोष के निधन के बाद नेत्रों का दान किया गया। परिजनों के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन काल में ही आंखें दान करने का संकल्प लिया था।
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Iउनका मानना था कि अगर कोई व्यक्ति मरने के बाद अपनी आंखें दान कर किसी अंधे आदमी के जीवन का अंधेरा दूर करता है, तो इससे बड़ा और पुण्य कार्य कोई नहीं है। इसी के चलते परिजनों ने संतोष के जीवन की इस इच्छा को पूरा किया।
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Iमुस्कान फाउंडेशन की अध्यक्ष नेहा मालिक ने बताया, चार फरवरी को संतोष शर्मा के स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र दिव्यांश ने मुस्कान फाउंडेशन की मदद से उनके नेत्रदान कराने की इच्छा को पूर्ण कराकर सराहनीय कार्य किया।
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Iसंतोष शर्मा के स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र दिव्यांश शर्मा ने नेहा मलिक से अपनी माता का नेत्रदान कराने के लिए संपर्क किया तो नेहा ने नेत्र बैंक हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट की चिकित्सक डॉ. नीलम वर्मा को सूचित किया।
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Iइसके बाद उनकी टीम में शामिल डॉ. सिमरन, डॉ. अनुज, डॉ. स्नेही आदि ने संतोष शर्मा के आवास पर पहुंचे और नेत्रदान करने की प्रक्रिया पूरी कराई। दिव्यांश ने बताया, वर्ष 2014 में उनके पिता धर्मपाल शर्मा के स्वर्गवास के बाद भी उन्होंने अपने पिता के नेत्रों का दान किया था।I