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ऋषि तर्पण से आज होगा रक्षा सूत्रों का संधान
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रक्षा बंधन पर्व के लिए खरीदारी करती महिलाएं ।
- फोटो : HARIDWAR
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श्रावणी उपाकर्म का पवित्र पर्व ऋषि तर्पण आज रविवार को मनाया जाएगा। गंगा आदि समस्त पवित्र नदियों के तटों पर हजारों पुरोहित सप्तऋषियों और ऋषि पत्नियों के वंशानु तर्पण करेंगे। गंगा के तटों पर करीब दो घंटे चलने वाला हिमाद्रि संकल्प स्नान आकर्षण का केंद्र रहेगा। स्नान के उपरांत वर्षभर पहनने के लिए यज्ञोपवीत और रक्षा सूत्रों का संधान किया जाएगा। पुरोहित अपने यजमान की कलाई पर रक्षासूत्र बांधेंगे और फिर बहनें राखी बांधेंगी।
ऋषि तर्पण कभी ब्राह्मणों के नित्यकर्म में शामिल था। अब यह पर्व श्रावण पूर्णिमा के दिन श्रावणी के रूप में मनाया जाता है। धर्मनगरी में प्रात:काल हरकी पैड़ी और कुशावर्त घाट पर पुरोहित यह पर्व मनाने के लिए जुटेंगे। पर्व का शुभारंभ गंगा किनारे खड़े होकर हिमाद्रि संकल्प से होगा और दोपहर बाद रक्षा सूत्रों का संधान वैदिक मंत्रों से किया जाएगा। हरिद्वार के रामघाट, भूमाघाट, कनखल के राजघाट आदि पर भी वशिष्ठ, कश्यप, भारद्वाज, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र व अत्रि आदि के वंशजों का भी तर्पण किया जाएगा। श्रावणी उपाकर्म सतयुगीन पर्व है। अभिसंचित सूत्रों का प्रयोग वर्षभर किया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार युद्ध में जाने वाले सेनापतियों की कलाई पर पत्नियां यही रक्षासूत्र बांधा करती थीं।
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गजकेसरी योग में होगा रक्षाबंधन का महापर्व
रक्षाबंधन श्रावणी का पर्व इस साल कुछ विशेष महत्व रखेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ शक्तिधर शास्त्री के अनुसार इस पर्व पर गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है जो अपने आप में बहुत ही विशेष और शुभ माना जाता है। चंद्रमा के साथ जब बृहस्पति की युति होती है तब गजकेसरी योग बनता है। इस वर्ष यह महासंयोग बहुत शुभ है व इस पर्व के महत्व को और अधिक बढ़ा रहा है। भद्रा काल सुबह 7:57 पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ही रक्षाबंधन करना बहुत ही शुभ होगा ।
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ऋषि वंशावली पाठ का महत्वपूर्ण दिन, अमृत योग
ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि समस्त ऋषियों और उनके वंश का वाचन करने का यह महत्वपूर्ण दिन है। पूरे दिन अमृत योग का बने रहना पर्व को और शुभ बनाता है। शुक्ल यजुर्वेदी साधकों का यह बहुत प्रमुख दिन है। अभिजित मुहूर्त एवं अमृत की होरा दोनों के विद्यमान होने से रक्षा सूत्र संधान व बंधन का यह दिन और भी विशिष्ट हो चला है।
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ऋषि तर्पण कभी ब्राह्मणों के नित्यकर्म में शामिल था। अब यह पर्व श्रावण पूर्णिमा के दिन श्रावणी के रूप में मनाया जाता है। धर्मनगरी में प्रात:काल हरकी पैड़ी और कुशावर्त घाट पर पुरोहित यह पर्व मनाने के लिए जुटेंगे। पर्व का शुभारंभ गंगा किनारे खड़े होकर हिमाद्रि संकल्प से होगा और दोपहर बाद रक्षा सूत्रों का संधान वैदिक मंत्रों से किया जाएगा। हरिद्वार के रामघाट, भूमाघाट, कनखल के राजघाट आदि पर भी वशिष्ठ, कश्यप, भारद्वाज, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र व अत्रि आदि के वंशजों का भी तर्पण किया जाएगा। श्रावणी उपाकर्म सतयुगीन पर्व है। अभिसंचित सूत्रों का प्रयोग वर्षभर किया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार युद्ध में जाने वाले सेनापतियों की कलाई पर पत्नियां यही रक्षासूत्र बांधा करती थीं।
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गजकेसरी योग में होगा रक्षाबंधन का महापर्व
रक्षाबंधन श्रावणी का पर्व इस साल कुछ विशेष महत्व रखेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ शक्तिधर शास्त्री के अनुसार इस पर्व पर गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है जो अपने आप में बहुत ही विशेष और शुभ माना जाता है। चंद्रमा के साथ जब बृहस्पति की युति होती है तब गजकेसरी योग बनता है। इस वर्ष यह महासंयोग बहुत शुभ है व इस पर्व के महत्व को और अधिक बढ़ा रहा है। भद्रा काल सुबह 7:57 पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ही रक्षाबंधन करना बहुत ही शुभ होगा ।
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ऋषि वंशावली पाठ का महत्वपूर्ण दिन, अमृत योग
ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि समस्त ऋषियों और उनके वंश का वाचन करने का यह महत्वपूर्ण दिन है। पूरे दिन अमृत योग का बने रहना पर्व को और शुभ बनाता है। शुक्ल यजुर्वेदी साधकों का यह बहुत प्रमुख दिन है। अभिजित मुहूर्त एवं अमृत की होरा दोनों के विद्यमान होने से रक्षा सूत्र संधान व बंधन का यह दिन और भी विशिष्ट हो चला है।