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ऋषि परंपरा को करें ग्रहण : रामदेव
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 06 Jan 2016 12:16 AM IST
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हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के 21 वर्ष पूरे होने पर आयोजित सामूहिक यज्ञ में बाबा रामदेव ने कहा कि हम ऋषियों की संतान हैं। इसलिए हमें ऋषि परंपरा को ग्रहण करनी चाहिए। ट्रस्ट के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने संस्थान की उपलब्धियों और सेवा प्रकल्पों की जानकारी दी।
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मंगलवार को पतंजलि योगपीठ के 21 वर्ष पूरे होने पर योगपीठ और इससे संबंधित समस्त इकाईयों के कार्यकर्ताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और साधकों ने मंगलवार को बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के सानिध्य में सामूहिक यज्ञ किया। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि ने अपनी 21 वर्षीय यात्रा में सदैव शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वदेशी, राष्ट्र-निर्माण व राष्ट्र उत्थान के कार्यों से देश को नए आयाम दिए हैं। गोरक्षा, गो-संवर्धन एवं पंचगव्य अनुसंधान पर पतंजलि ने वर्षों कार्य किया है। रसायनिक खाद व कीटनाशक मुक्त जैविक कृषि का प्रशिक्षण देकर कृषकों को जड़ी-बूटी कृषि के लिए प्रेरित किया। आचार्य ने कहा कि पतंजलि ने योग व आयुर्वेद के माध्यम से देश के नागरिकों को आरोग्य प्रदान किया है। बाबा रामदेव ने कहा कि राष्ट्रवादिता, पराक्रमशीलता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, मानवतावाद, अध्यात्मवाद और विनयशीलता यह सप्त-सिद्धांत हमारे वैयक्तिक और राष्ट्रीय जीवन के मूलभूत सिद्धांत एवं आदर्श हैं। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताया। कहा कि पतंजलि ने जो सेवाएं देश व समाज को दी हैं उनमें आचार्य बालकृष्ण का बहुत बड़ा योगदान है। जाने-माने कवि हरिओम पंवार ने अपने काव्यपाठ से उपस्थित लोगों को ओत-प्रोत किया।
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