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अध्यक्ष की कुर्सी का रार, अब निर्मल अखाड़े में दो फाड़

Fri, 22 Oct 2021 08:12 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 08:12 PM IST
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Rar for the chair of the president, now two torn in the Nirmal arena
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर संतों की लड़ाई तेज हो गई है। 25 अक्तूबर को प्रयागराज में प्रस्तावित बैठक से पहले बृहस्पतिवार को सात अखाड़े अपने अध्यक्ष और महामंत्री के साथ कार्यकारिणी की घोषणा कर चुके हैं। इसके बाद से अब अखाड़ों में घमासान मच गया है। नई कार्यकारिणी को समर्थन करने वाले निर्मल अखाड़े में भी दो फाड़ हो गए हैं। निर्मल अखाड़े के एक धड़े ने 25 अक्तूबर को प्रयागराज की प्रस्तावित बैठक को समर्थन दे दिया है। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि भी बैठक की तैयारियों को लेकर हरिद्वार से रवाना हो गए हैं।
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13 अखाड़ों के समन्वय और कुंभ आयोजन के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद बनी है। परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की 20 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद से अध्यक्ष की कुर्सी के लिए अखाड़ों में खींचतान मची है। परिषद महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने 25 अक्तूबर को प्रयागराज स्थित श्री निरंजनी अखाड़ा दारागंज में बैठक बुलाई है। इसमें अध्यक्ष पद के लिए आम सहमति बनानी हैं। बृहस्पतिवार को तीनों बैरागी अखाड़ों के साथ सात अखाड़ों ने अचानक परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री समेत कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। परिषद अध्यक्ष महानिर्वाणी के रविंद्रपुरी और महामंत्री राजेंद्र दास की घोषणा कर दी।
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नई कार्यकारिणी के बाद से अखाड़ों की अंदरूनी घमासान भी खुलकर सामने आने लगा है। सात अखाड़ों में निर्मल अखाड़े के संत भी नई कार्यकारिणी के समर्थन में शामिल हुए। लेकिन शुक्रवार को निर्मल अखाड़े में ही घमासान मच गया। अखाड़े के महंत प्रेम सिंह ने कहा कि 25 अक्तूबर की प्रयागराज बैठक में निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत रेशम सिंह और कोठारी महंत गोपाल सिंह और अन्य संत शामिल होंगे। जबकि निर्मल अखाड़े कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने कहा कि बाबा प्रेम सिंह खुद को एक्कड़ कला शाखा का महंत घोषित कर दिया था। उन्होंने कहा कि 25 अक्तूबर की प्रयागराज बैठक का अब कोई औचित्य नहीं है। वहीं, अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि शुक्रवार को हरिद्वार से रवाना हो गए। वृंदावन के बाद हरिगिरि प्रयागराज पहुंचेंगे और बैठक को लेकर तैयारियां करेंगे।
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अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे हैं रविंद्रपुरी
हरिद्वार कुंभ आयोजन के दौरान 18 अप्रैल को तीनों बैरागी अखाड़ों ने नाराजगी जताते हुए परिषद से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद अखाड़ा परिषद में 10 अखाड़े ही रह गए। इन्हीं अखाड़ों से अध्यक्ष पद की दौड़ में श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी सबसे आगे थे। जबकि महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्रपुरी भी प्रबल दावेदार थे।
अब अखाड़ों के संख्या बल पर टिका अध्यक्ष का चयन
अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने नई कार्यकारिणी को न्याय संगत नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार कार्यकारिणी घोषणा से पहले एजेंडा जारी होना चाहिए थे, लेकिन रातोंरात नई कार्यकारिणी बना दी गई। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के लिए जो भी दावेदार हैं, उन्हें प्रयागराज की बैठक में बहुमत साबित करना चाहिए। बैठक का एजेंडा सभी अखाड़ों को पहले ही जारी किया जा चुका है। सात अखाड़ों ने नई कार्यकारिणी घोषित की है। अब निर्मल अखाड़े के दो फाड़ होने के बाद 25 अक्तूबर की प्रस्तावित बैठक के लिए भी सात अखाड़ों का समर्थन मिल गया है। इनमें जूना अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, नया अखाड़ा श्री निरंजनी अखाड़ा और निर्मल अखाड़ा शामिल है।

प्रयाग में सुबह 11 बजे होगी बैठक
प्रयागराज में बैठक 25 अक्तूबर की सुबह 11 बजे से शुरू होगी। इसमें सात अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें दो-दो श्रीमहंत शामिल होंगे। बहुमत के आधार पर अध्यक्ष का चयन होगा। यदि बैठक में आम सहमति नहीं बनती है तो भविष्य में फिर बैठक बुलाई जाएगी।
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