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यहीं आई थी भगवान भोलेनाथ की बारात
hridwar uttrakhanda india
Updated Tue, 21 Feb 2017 12:01 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो/हरिद्वार
- फोटो : अमर उजाला
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सतयुग में शिव और शक्ति का मिलन हरिद्वार के कनखल में हुआ था। राजा दक्ष का वह महल अब पौराणिक दक्ष मंदिर का स्वरूप ले चुका है। यहीं भोलेनाथ की बारात आई थी। सती को ब्याह कर शिव यहीं से कैलाश ले गए थे।
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राजा दक्ष अनादि त्रिदेवों में से एक ब्रह्मा के पुत्र थे। दक्ष की राजधानी कनखल में थी और हिमालय में कांठा पर्वत तक फैली हुई थी। दक्ष के साम्राज्य की सीमा केवल भारत में ही नहीं, अब भारत से अलग हो चुके अनेक देशों तक फैली हुई थी। दक्ष की ज्येष्ठ पुत्री थी सती। सती और शिव के बीच बढ़ता हुआ मानसिक प्रेम राजा दक्ष को पसंद नहीं था। दक्ष नहीं चाहते थे कि सती उस शिव से विवाह करे, जिस शिव ने ब्रह्मा के दरबार में उनका अपमान किया था। वास्तव में राजा दक्ष जब अपने पिता से मिलने ब्रह्म दरबार गए थे, तब सभी देवी देवता उठकर खड़े हो गए थे। समकालीन आदि देव ब्रह्मा के समकक्ष होने के नाते शिव ने दक्ष का स्वागत उठकर नहीं किया। तब दक्ष ने शिव से शत्रुता की गांठ बांध ली। उन्हें जब पता चला कि शिव और सती परस्पर प्रेम में लीन हैं तो भरसक प्रयास कर दोनों को अलग करने का प्रयत्न किया। दक्ष की एक न चली और एक दिन शिव और शक्ति एक हो गए। इसी महल में भगवान शंकर सती को ब्याहने आए और भूतगणों के साथ ब्याह कर ले गए।
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कालांतर में राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ कनखल में किया। सभी देवी देवताओं को बुलाया, लेकिन पुत्री और जामाता को निमंत्रण नहीं भेजा। इतना विराट यज्ञ होता देख कैलाश में बैठी सती ने कनखल जाने की इच्छा व्यक्त की। शिव ने बिन बुलाए जाने से मना किया पर सती नहीं मानी और चली आई। यज्ञ में शिव का अपमान देखकर सती ने देवताओं को धिक्कारा और अपने देह को अग्नि में भस्म कर दिया। बाद में शिव ने अपने गणों के साथ यज्ञ का विध्वंस किया और उनके गण वीरभद्र ने दक्ष की गर्दन काट डाली। देवताओं की प्रार्थना पर शिव ने बकरे की गर्दन दक्ष के धड़ पर लगाई। जीवित हुए दक्ष ने तब शिव की आराधना की और उनसे आग्रह किया कि वे दक्षेश्वर बनकर कनखल में विराजमान हों। तब से हर सावन में और शिवरात्रि पर शिव कनखल आते हैं। दक्ष मंदिर बेहद पौराणिक मंदिर है और इतिहास में इसका भारी महत्व है। भगवान शिव का दर्शन करने के लिए यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
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