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प्लाटून कमांडर का बेटा बना लेफ्टिनेंट
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 10 Dec 2016 10:41 PM IST
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40वीं वाहिनी पीएसी में प्लाटून कमांडर प्रवीण कुमार के बेटे शिवम कुमार ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने परिवार और हरिद्वार का गौरव बढ़ाया है। शनिवार को इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में पासिंग आउट परेड में बेटे को सेना का अफसर बनते देखने के लिए पूरा परिवार देहरादून पहुंचा।
ज्वालापुर सुभाषनगर निवासी प्रवीण कुमार उत्तराखंड पुलिस में तैनात हैं। वह 40वीं वाहिनी पीएसी मेें बतौर प्लाटून कमांडर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके बड़े बेटे शिवम ने भेल सेक्टर पांच के विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 10वीं और सेंट मैरी पब्लिक स्कूल ज्वालापुर से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद शिवम ने डीआईटी देहरादून से इंजीनियरिंग की। सीडीएस एग्जाम पास करने के बाद डेढ़ साल से शिवम की आईएमए देहरादून में ट्रेनिंग चल रही थी।
अमर उजाला से बातचीत में शिवम ने बताया कि स्कूल टाइम से उनका सपना था कि सेना में अफसर बनकर देश की सेवा करें। इस बीच उन्होंने बीसीए भी किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सेना के प्रति मोटिवेट हुआ और सीडीएस एग्जाम देने का फैसला लिया। बेटे की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। पिता प्रवीण कुमार, माता अनिता देवी, छोटे भाई अक्षत और आकाश सहित शिक्षक चाचा आशीष कुमार ने शिवम की उपलब्धि पर गर्व जताया।
ज्वालापुर सुभाषनगर निवासी प्रवीण कुमार उत्तराखंड पुलिस में तैनात हैं। वह 40वीं वाहिनी पीएसी मेें बतौर प्लाटून कमांडर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके बड़े बेटे शिवम ने भेल सेक्टर पांच के विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 10वीं और सेंट मैरी पब्लिक स्कूल ज्वालापुर से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद शिवम ने डीआईटी देहरादून से इंजीनियरिंग की। सीडीएस एग्जाम पास करने के बाद डेढ़ साल से शिवम की आईएमए देहरादून में ट्रेनिंग चल रही थी।
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अमर उजाला से बातचीत में शिवम ने बताया कि स्कूल टाइम से उनका सपना था कि सेना में अफसर बनकर देश की सेवा करें। इस बीच उन्होंने बीसीए भी किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सेना के प्रति मोटिवेट हुआ और सीडीएस एग्जाम देने का फैसला लिया। बेटे की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। पिता प्रवीण कुमार, माता अनिता देवी, छोटे भाई अक्षत और आकाश सहित शिक्षक चाचा आशीष कुमार ने शिवम की उपलब्धि पर गर्व जताया।
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