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नालों के बीच निकाले जा पाइपों से होगा खतरा
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ऊर्जा निगम शहर के जल निकासी के नालों से भूमिगत केबिल ले जाने के लिए नालों के बीच में स्टील पाइप निकाले करा रहा है। लोग इसको खतरे की घंटी बता रहे हैं। नालों के बीच में पाइप में होने से नालों से जल निकासी भी बाधित होगी। खासकर बरसात के मौसम में जब बरसाती नालों में उफान आता है तब बड़ा खतरा होगा।
विपिन शर्मा, रघुनाथ सिंह, महिपाल आदि लोगों का कहना है कि राजाजी पार्क से वार्ड नंबर तीन दुर्गानगर से जो बरसाती नाला लोकनाथ घाट से नहर में निकलता है, उस नाले के बीच में केबिल ले जाने के लिए कई पाइप लगा दिए गए हैं। बरसात में यह नाला ओवरफ्लो होता है। पतंजलि आश्रम से सर्वानंद घाट तक चार-चार फीट पानी का तालाब बन जाता है। पाइपों जंग लगने से वह क्षतिग्रस्त होंगे तब उनके अंदर की केबिल कैसे सुरक्षित रह पाएगी। सुनील मिश्रा, बागेश्वर पांडेय ने बताया कि पावनधाम की पुलिया के सामने हाइवे से सप्तसरोवर जाने मार्ग पर हाइवे पर अधूरे बने नालों के अंदर से पाइप ले जाए जा रहे हैं। क्षेत्र में पार्क के जंगल से बरसाती नदी उफान मारती है तो हाइवे भी नहीं चल पाता है। पाइपों में कूड़ा अटकने तथा पानी के साथ जंगल से आने वाले पत्थरों की टक्कर से ऊर्जा निगम के पाइप भी बह जाने वाले हैं, जिससे भयंकर खतरा हो सकता है।
ऊर्जा निगम भूमिगत केबिल डालने में सुरक्षा तथा गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं कर रहा है। नालों से केबिल ले जाने के लिए पाइप लगाने की जांच की जाएगी। कहीं पर कुछ गलत पाया जाता है तो उनको हटवा दिया जाएगा। भूमिगत केबिल की गुणवत्ता की उच्चस्तर पर निगरानी की जा रही है।
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-अंकित कुमार जैन, अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम कुंभ
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विपिन शर्मा, रघुनाथ सिंह, महिपाल आदि लोगों का कहना है कि राजाजी पार्क से वार्ड नंबर तीन दुर्गानगर से जो बरसाती नाला लोकनाथ घाट से नहर में निकलता है, उस नाले के बीच में केबिल ले जाने के लिए कई पाइप लगा दिए गए हैं। बरसात में यह नाला ओवरफ्लो होता है। पतंजलि आश्रम से सर्वानंद घाट तक चार-चार फीट पानी का तालाब बन जाता है। पाइपों जंग लगने से वह क्षतिग्रस्त होंगे तब उनके अंदर की केबिल कैसे सुरक्षित रह पाएगी। सुनील मिश्रा, बागेश्वर पांडेय ने बताया कि पावनधाम की पुलिया के सामने हाइवे से सप्तसरोवर जाने मार्ग पर हाइवे पर अधूरे बने नालों के अंदर से पाइप ले जाए जा रहे हैं। क्षेत्र में पार्क के जंगल से बरसाती नदी उफान मारती है तो हाइवे भी नहीं चल पाता है। पाइपों में कूड़ा अटकने तथा पानी के साथ जंगल से आने वाले पत्थरों की टक्कर से ऊर्जा निगम के पाइप भी बह जाने वाले हैं, जिससे भयंकर खतरा हो सकता है।
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ऊर्जा निगम भूमिगत केबिल डालने में सुरक्षा तथा गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं कर रहा है। नालों से केबिल ले जाने के लिए पाइप लगाने की जांच की जाएगी। कहीं पर कुछ गलत पाया जाता है तो उनको हटवा दिया जाएगा। भूमिगत केबिल की गुणवत्ता की उच्चस्तर पर निगरानी की जा रही है।
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-अंकित कुमार जैन, अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम कुंभ