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पीएफ मलेरिया का मरीज मिला
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:33 PM IST
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हरिद्वार। जनपद में सर्दियों में लगातार मलेरिया
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के मामले सामने आते रहे है। लेकिन अब जांच में एक मरीज में मलेरिया के
खतरनाक लक्षण सामने आए है। जिसमें प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम (पीएफ) मलेरिया
के कीड़ा सामने आया है। पीड़ित सराय का सूरज मेला अस्पताल में भर्ती है।
जनपद में डेंगू, स्क्रब टायफस, मलेरिया के केस सामने आते रहे हैं। इस साल सर्दियों में भी मलेरिया के मामले आते रहे। प्रत्येक महीने में दस से बीस तक मरीजों के मामले आते रहे। अब एक मरीज की जांच में मलेरिया का गंभीर मामला सामने आया है। डा. अखिलेश ने बताया कि मेला अस्पताल में भर्ती मरीज के ब्लड की जांच में प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम (पीएफ) मलेरिया का कीड़ा आया है। यह खतरनाक मलेरिया होता है। जिला मलेरिया अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि पीएफ मलेरिया की पुष्टि हुई है। इसकी दवाई उपलब्ध है। मेला अस्पताल में भर्ती कर मरीज का इलाज किया जा रहा है।
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गर्भवती के लिए अधिक खतरनाक
डा. अखिलेश ने बताया कि पीएफ मलेरिया गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक खतरनाक होता है। इसमें गर्भपात हो सकता है और बीमारी में इसकी दवाई लेने पर गर्भ में पल रहे बच्चे पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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यह है बीमारी के कारण
मलेरिया का बुखार ज्यादातर बारिश के मौसम में होता हैं। यह एनोफिलीस नामक मादा मच्छरों के द्वारा फैलता है। मादा एनोफिलीज नामक मच्छर मरीज का ब्लड चूस लेते हैं। यही परजीवी युक्त मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं, तो वह इस रोग से पीड़ित हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति के ब्लड की जांच में सिर्फ माइक्रोस्कोप पर ही यह देखे जा सकते है।
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यह है मलेरिया के लक्षण
मलेरिया में लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) को प्रभावित करता है। जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और मरीज कमजोर होता जाता है। शरीर का तापमान 101 से 105 डिग्री तक बना रहता है। मरीज को काफी ठंड लगती है और कांपने लगता है। पूरे शरीर के साथ माथे में दर्द, चेहरा लाल, शरीर का रूखा पड़ जाना, पीड़ित को प्यास लगती है, सांस लेने में तकलीफ, जी मिचलाना, उल्टी होती है। गर्मी में मरीज को बहुत पसीना आता है और बुखार बिल्कुल उतर जाता है। मरीज के जिगर और तिल्ली आदि बढ़ जाते हैं।
जनपद में डेंगू, स्क्रब टायफस, मलेरिया के केस सामने आते रहे हैं। इस साल सर्दियों में भी मलेरिया के मामले आते रहे। प्रत्येक महीने में दस से बीस तक मरीजों के मामले आते रहे। अब एक मरीज की जांच में मलेरिया का गंभीर मामला सामने आया है। डा. अखिलेश ने बताया कि मेला अस्पताल में भर्ती मरीज के ब्लड की जांच में प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम (पीएफ) मलेरिया का कीड़ा आया है। यह खतरनाक मलेरिया होता है। जिला मलेरिया अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि पीएफ मलेरिया की पुष्टि हुई है। इसकी दवाई उपलब्ध है। मेला अस्पताल में भर्ती कर मरीज का इलाज किया जा रहा है।
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गर्भवती के लिए अधिक खतरनाक
डा. अखिलेश ने बताया कि पीएफ मलेरिया गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक खतरनाक होता है। इसमें गर्भपात हो सकता है और बीमारी में इसकी दवाई लेने पर गर्भ में पल रहे बच्चे पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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यह है बीमारी के कारण
मलेरिया का बुखार ज्यादातर बारिश के मौसम में होता हैं। यह एनोफिलीस नामक मादा मच्छरों के द्वारा फैलता है। मादा एनोफिलीज नामक मच्छर मरीज का ब्लड चूस लेते हैं। यही परजीवी युक्त मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं, तो वह इस रोग से पीड़ित हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति के ब्लड की जांच में सिर्फ माइक्रोस्कोप पर ही यह देखे जा सकते है।
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यह है मलेरिया के लक्षण
मलेरिया में लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) को प्रभावित करता है। जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और मरीज कमजोर होता जाता है। शरीर का तापमान 101 से 105 डिग्री तक बना रहता है। मरीज को काफी ठंड लगती है और कांपने लगता है। पूरे शरीर के साथ माथे में दर्द, चेहरा लाल, शरीर का रूखा पड़ जाना, पीड़ित को प्यास लगती है, सांस लेने में तकलीफ, जी मिचलाना, उल्टी होती है। गर्मी में मरीज को बहुत पसीना आता है और बुखार बिल्कुल उतर जाता है। मरीज के जिगर और तिल्ली आदि बढ़ जाते हैं।