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गजब हाल: वार्ड ब्याय बांट रहा दवाई
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दो दर्जन से अधिक गांवों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बदहाल है। फार्मासिस्ट छुट्टी पर होने से वार्ड ब्यॉय मरीजों को दवाई बांट रहे हैं तो खून की जांच ठप पड़ी हुई है। इससे मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और उन्हें परेशानी अलग से उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए 1987 में प्राथमिक स्वास्थ्य बनाया गया था। तब से अब तक केंद्र का उच्चीकरण नही हो पाया है। इसके कारण डॉक्टरों की संख्या भी नहीं बढ़ पाई है। जबकि लालढांग, चमरिया, मीठीबेरी, गैंडीखाता, गुर्जर बस्ती, श्यामपुर, कांगड़ी आदि गांवों की करीब 40 हजार की आबादी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे हैं।
बृहस्पतिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात तीन डॉक्टरों में से दो मौजूद मिले। इनमें से एक आकस्मिक अवकाश लेकर चले गए। एक अवकाश पर थे। फार्मासिस्ट लंबी छुट्टी पर होने से उनकी जगह वार्ड ब्याय रोहित मरीजों को दवा बांटते हुए मिले। वहीं, ब्लड जांच केंद्र के एनएचएम कर्मचारी के हड़ताल पर होने से मरीजों के खून की जांच छह दिसंबर से ठप पड़ी है। इससे मरीजों को जांच के लिए हरिद्वार के सरकारी और निजी लैैैब की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसमें सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को रही है। संवाद
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खून की जांच कराने के लिए आई थी, लेकिन कर्मचारी नहीं होने से निराश लौटना पड़ रहा है। अब जांच कराने के लिए हरिद्वार जाना पड़ेगा।
- नूतन, मंगौलपुरा
सर्दी लगने के कारण कई दिनों से छाती में दर्द हो रहा था। इसलिए डॉक्टर को दिखा दिया है, दवा भी मिल गया है।
- राकेश, लालढांग
बच्चे को बुखार हो गया है। डॉक्टर को दिखाकर दवाई ले ली है। यदि फार्मासिस्ट अवकाश पर चले गए हैं तो दूसरे को भेजना चाहिए।
- चरणजीत सिंह, मोहल्लापुरी
सर्दी बढ़ने के साथ ही खांसी और जुकाम हो गया है। इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पर आया था। स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण होना चाहिए।
- सोनू, मालूखाता
वार्ड ब्यॉय अगर दवाई बांट रहे हैं तो उसे दिखवाया जाएगा। बंद जांच केंद्र को भी चलवाने का प्रयास किया जाएगा।
- डा. हमेंत आर्य, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बहादराबाद
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ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए 1987 में प्राथमिक स्वास्थ्य बनाया गया था। तब से अब तक केंद्र का उच्चीकरण नही हो पाया है। इसके कारण डॉक्टरों की संख्या भी नहीं बढ़ पाई है। जबकि लालढांग, चमरिया, मीठीबेरी, गैंडीखाता, गुर्जर बस्ती, श्यामपुर, कांगड़ी आदि गांवों की करीब 40 हजार की आबादी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे हैं।
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बृहस्पतिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात तीन डॉक्टरों में से दो मौजूद मिले। इनमें से एक आकस्मिक अवकाश लेकर चले गए। एक अवकाश पर थे। फार्मासिस्ट लंबी छुट्टी पर होने से उनकी जगह वार्ड ब्याय रोहित मरीजों को दवा बांटते हुए मिले। वहीं, ब्लड जांच केंद्र के एनएचएम कर्मचारी के हड़ताल पर होने से मरीजों के खून की जांच छह दिसंबर से ठप पड़ी है। इससे मरीजों को जांच के लिए हरिद्वार के सरकारी और निजी लैैैब की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसमें सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को रही है। संवाद
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खून की जांच कराने के लिए आई थी, लेकिन कर्मचारी नहीं होने से निराश लौटना पड़ रहा है। अब जांच कराने के लिए हरिद्वार जाना पड़ेगा।
- नूतन, मंगौलपुरा
सर्दी लगने के कारण कई दिनों से छाती में दर्द हो रहा था। इसलिए डॉक्टर को दिखा दिया है, दवा भी मिल गया है।
- राकेश, लालढांग
बच्चे को बुखार हो गया है। डॉक्टर को दिखाकर दवाई ले ली है। यदि फार्मासिस्ट अवकाश पर चले गए हैं तो दूसरे को भेजना चाहिए।
- चरणजीत सिंह, मोहल्लापुरी
सर्दी बढ़ने के साथ ही खांसी और जुकाम हो गया है। इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पर आया था। स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण होना चाहिए।
- सोनू, मालूखाता
वार्ड ब्यॉय अगर दवाई बांट रहे हैं तो उसे दिखवाया जाएगा। बंद जांच केंद्र को भी चलवाने का प्रयास किया जाएगा।
- डा. हमेंत आर्य, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बहादराबाद