फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Patanjali has preserved over 27,000 plant specimens.

Haridwar News: पतंजलि ने 27 हजार से अधिक पादप नमूने संरक्षित किए

Tue, 29 Sep 2026 05:55 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 05:55 PM IST
विज्ञापन
Patanjali has preserved over 27,000 plant specimens.
फोटो :
विज्ञापन

- 100 से ज्यादा नए रिकॉर्ड पादप अभिलेखों में दर्ज किए गए
- जिले में फ्लोरा ऑफ हरिद्वार का कार्य प्रगति पर
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन (पीआरएफ) ने भारत की वनस्पति विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फाउंडेशन ने अब तक 27 हजार से अधिक पादप नमूनों को पतंजलि पादपालय में संरक्षित किया है। इसमें वैज्ञानिकों ने देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक नए पादप अभिलेख दर्ज किए हैं। पीआरएफ ने 2024 में दुनिया को कैम्पेन्यूला डेन्सीसिलिएटा नामक एक नई पादप प्रजाति भी दी है।
आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में पीआरएफ के वैज्ञानिक लगातार पादप अन्वेषण और अनुसंधान कर रहे हैं। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली सहित कई राज्यों में सर्वेक्षण किए हैं। इनमें हरियाणा, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
विज्ञापन

इन सर्वेक्षणों से अनेक पादपों को राज्यों के वनस्पति अभिलेख में दर्ज किया गया। राष्ट्रपति भवन में पहली बार 620 से अधिक पौधों को रिकॉर्ड किया गया। 2 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन और मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया। पीआरएफ के वैज्ञानिक कई नई पादप प्रजातियों का अध्ययन भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
व्यापक सर्वेक्षण और खोज
आचार्य बालकृष्ण ने अष्टवर्ग के पादपों की खोज और पहचान की है। उन्होंने एक हरबेरियम बनाया और अष्टवर्ग रहस्य पुस्तक प्रकाशित की। पीआरएफ ने 2023-24 में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गोमुख से गंगासागर तक पादप सर्वेक्षण किया। इस दौरान अनेक पादपों को राज्यों के पादप अभिलेखों में दर्ज किया गया। अरुणाचल प्रदेश के पाके-कसांग जिले के सिजोसा क्षेत्र का भी सर्वे किया गया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि नई पादप प्रजातियों की खोज केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है। यह जैव विविधता संरक्षण और औषधीय पौधों की पहचान का आधार है। यह पर्यावरणीय अध्ययन और भविष्य के वानस्पतिक अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रत्येक नई खोज भारत की प्राकृतिक विरासत को वैज्ञानिक रूप से बढ़ाती है। हरिद्वार जिले में फ्लोरा ऑफ हरिद्वार का कार्य प्रगति पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed