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सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव : मुख्यमंत्री धामी
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फोटो
- उत्तराखंड के 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को मिला क्षमता विकास का मंत्र
बोले मुख्यमंत्री- पंचायत का पैसा जनता का है, इसकी एक-एक पाई का हिसाब देना अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। यह बात उन्होंने सिडकुल स्थित एक होटल में आयोजित अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने इसे ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है। इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना अनिवार्य है।
धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। कहा कि वे सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। ये प्रतिनिधि स्थानीय समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। साथ ही, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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कहा कि प्रत्येक पंचायत स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करें, ताकि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिले। ग्राम सभाओं में लोगों के सुझाव लिए जाएं और कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।
कहा कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत की गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की संख्या से अधिक प्रभाव मायने रखता है, इसलिए, सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
कहा कि गांवों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी समान ध्यान देना होगा। पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग कर पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएं।
पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व की सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की अपील की।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक भेल रानीपुर आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, देशराज कर्णवाल, आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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- उत्तराखंड के 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को मिला क्षमता विकास का मंत्र
बोले मुख्यमंत्री- पंचायत का पैसा जनता का है, इसकी एक-एक पाई का हिसाब देना अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। यह बात उन्होंने सिडकुल स्थित एक होटल में आयोजित अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने इसे ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है। इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना अनिवार्य है।
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धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। कहा कि वे सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। ये प्रतिनिधि स्थानीय समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। साथ ही, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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कहा कि प्रत्येक पंचायत स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करें, ताकि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिले। ग्राम सभाओं में लोगों के सुझाव लिए जाएं और कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।
कहा कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत की गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की संख्या से अधिक प्रभाव मायने रखता है, इसलिए, सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
कहा कि गांवों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी समान ध्यान देना होगा। पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग कर पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएं।
पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व की सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की अपील की।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक भेल रानीपुर आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, देशराज कर्णवाल, आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।