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चेक बाउंस में अर्थदंड और एक माह का कारावास
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चेक बाउंस के मामले में आरोपी को दोषी पाते हुए एक माह के साधारण कारावास और 10 लाख 75 हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया है। साथ ही अर्थदंड की धनराशि में से 10 लाख 70 हजार बतौर प्रतिकार परिवादी को दिए जाने के आदेश किए हैं।
परिवादी रविंद्र चौहान निवासी ग्राम अतमलपुर बोंगला हरिद्वार अपने अधिवक्ता विवेक चौहान व अमित चौहान की ओर से न्यायालय में एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय में परिवाद दाखिल कराया था। न्यायालय में बताया था कि वह और अभियुक्त अविनाश निवासी ग्राम रोहालकी किशनपुर हरिद्वार में आपस में रिश्तेदारी थी। रिश्तेदारी के चलते अपने मकान की मरम्मत व शादी के लिए परिवादी से 13 सितंबर 2013 को 9 लाख रुपसे व 19 अक्तूबर 2013 को एक लाख कुल दस लाख रुपये नकद परिवादी के लड़के के सामने उधार लिए थे और शादी के बाद रकम वापस करने की बात कही थी। परिवादी को जब यह ज्ञात हुआ कि अभियुक्त की ओर से मेरे पुत्र सचिन कुमार से फरवरी व मार्च 2016 में 13 लाख 50 हजार जमीन के एवज में हड़प लिए। तब परिवादी ने अभियुक्त से अपने पूर्व में दिए 10 लाख रुपये की मांग रविंद्र कुमार द्वारा अपनी रकम की मांग करने पर अभियुक्त अविनाश ने रविंद्र कुमार को 1 अगस्त 2017 को अपने खाते इंडियन ओवरसीज बैंक का एक चेक 10 लाख रुपए का रविंद्र कुमार को दिया था।
जब रविंद्र कुमार ने चेक भुगतान अपने बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया तो वह पर्याप्त निधि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। जिसके बाद रविंद्र कुमार ने अपने अधिवक्ता की ओर से अविनाश को एक नोटिस भिजवाया, परंतु नोटिस मिलने के बावजूद भी अविनाश की ओर से मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई करते हुए द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट पारुल थपलियाल ने आरोपी अविनाश और भोला को एनआई एक्ट अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत दोषी पाते हुए 1 वर्ष के साधारण कारावास व 10 लाख 75 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की धनराशि में से 10 लाख 70 हजार शिकायतकर्ता को देने के आदेश किए हैं।
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परिवादी रविंद्र चौहान निवासी ग्राम अतमलपुर बोंगला हरिद्वार अपने अधिवक्ता विवेक चौहान व अमित चौहान की ओर से न्यायालय में एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय में परिवाद दाखिल कराया था। न्यायालय में बताया था कि वह और अभियुक्त अविनाश निवासी ग्राम रोहालकी किशनपुर हरिद्वार में आपस में रिश्तेदारी थी। रिश्तेदारी के चलते अपने मकान की मरम्मत व शादी के लिए परिवादी से 13 सितंबर 2013 को 9 लाख रुपसे व 19 अक्तूबर 2013 को एक लाख कुल दस लाख रुपये नकद परिवादी के लड़के के सामने उधार लिए थे और शादी के बाद रकम वापस करने की बात कही थी। परिवादी को जब यह ज्ञात हुआ कि अभियुक्त की ओर से मेरे पुत्र सचिन कुमार से फरवरी व मार्च 2016 में 13 लाख 50 हजार जमीन के एवज में हड़प लिए। तब परिवादी ने अभियुक्त से अपने पूर्व में दिए 10 लाख रुपये की मांग रविंद्र कुमार द्वारा अपनी रकम की मांग करने पर अभियुक्त अविनाश ने रविंद्र कुमार को 1 अगस्त 2017 को अपने खाते इंडियन ओवरसीज बैंक का एक चेक 10 लाख रुपए का रविंद्र कुमार को दिया था।
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जब रविंद्र कुमार ने चेक भुगतान अपने बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया तो वह पर्याप्त निधि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। जिसके बाद रविंद्र कुमार ने अपने अधिवक्ता की ओर से अविनाश को एक नोटिस भिजवाया, परंतु नोटिस मिलने के बावजूद भी अविनाश की ओर से मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई करते हुए द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट पारुल थपलियाल ने आरोपी अविनाश और भोला को एनआई एक्ट अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत दोषी पाते हुए 1 वर्ष के साधारण कारावास व 10 लाख 75 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की धनराशि में से 10 लाख 70 हजार शिकायतकर्ता को देने के आदेश किए हैं।
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