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युवाओं को प्रेरणा देती है मुक्खा सिंह की देशभक्ति
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अंग्रेजों से लोहा लेते हुए फांसी के फंदे पर झूलने वाले कटारपुर के मुक्खा सिंह चौहान की देशभक्ति युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। आठ फरवरी को भी उनकी याद में गोरक्षा बलिदान दिवस मनाया जाता है।
बताया जाता है कि अंग्रेजों के शासन काल के दौरान कटारपुर में एक अंग्रेज अधिकारी ने सितंबर 1918 को दूसरे समुदाय के त्योहार पर गायों को मारने का फरमान जारी किया था। ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने गोरक्षा करने की ठान ली। इनमें गांव के चैनसुख का बेटा मुक्खा सिंह चौहान भी शामिल था। अंग्रेज पुलिस अधिकारी के आदेश पर पांच गायों को पेड़ के नीचे मारने के लिये बांध दिया था। इससे पहले गायों की हत्या होती मुक्खा सिंह चौहान के नेतृत्व में गांव वालों ने पेड़ से बंधी सभी गायों को आजाद कर दिया। गांव वालों की इस हिमाकत से नाराज अंग्रेज अधिकारी ने घटना में शामिल 135 गांव वालों को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया।
अगस्त 1919 में मुक्खा सिंह चौहान और अन्य लोगों को दस साल की काला पानी की सजा सुनाई। आठ फरवरी 1920 को अंग्रेजों ने मुक्खा सिंह चौहान को फांसी दी। बाद में देश आजाद हुआ और ग्रामीणों ने उसी पेड़ के नीचे जहां अंग्रेज अधिकारी ने पांच गायों को मारने के लिए बांधा था। वहां मुक्खा सिंह चौहान की याद में एक गौ रक्षक स्मारक का निर्माण कराया। हरिद्वार लक्सर मार्ग से जुड़ने वाले गांव के मुख्य मार्ग पर इस वर्ष मुक्खा सिंह चौहान के नाम से मुख्य द्वार का निर्माण कराया गया है।
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बताया जाता है कि अंग्रेजों के शासन काल के दौरान कटारपुर में एक अंग्रेज अधिकारी ने सितंबर 1918 को दूसरे समुदाय के त्योहार पर गायों को मारने का फरमान जारी किया था। ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने गोरक्षा करने की ठान ली। इनमें गांव के चैनसुख का बेटा मुक्खा सिंह चौहान भी शामिल था। अंग्रेज पुलिस अधिकारी के आदेश पर पांच गायों को पेड़ के नीचे मारने के लिये बांध दिया था। इससे पहले गायों की हत्या होती मुक्खा सिंह चौहान के नेतृत्व में गांव वालों ने पेड़ से बंधी सभी गायों को आजाद कर दिया। गांव वालों की इस हिमाकत से नाराज अंग्रेज अधिकारी ने घटना में शामिल 135 गांव वालों को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया।
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अगस्त 1919 में मुक्खा सिंह चौहान और अन्य लोगों को दस साल की काला पानी की सजा सुनाई। आठ फरवरी 1920 को अंग्रेजों ने मुक्खा सिंह चौहान को फांसी दी। बाद में देश आजाद हुआ और ग्रामीणों ने उसी पेड़ के नीचे जहां अंग्रेज अधिकारी ने पांच गायों को मारने के लिए बांधा था। वहां मुक्खा सिंह चौहान की याद में एक गौ रक्षक स्मारक का निर्माण कराया। हरिद्वार लक्सर मार्ग से जुड़ने वाले गांव के मुख्य मार्ग पर इस वर्ष मुक्खा सिंह चौहान के नाम से मुख्य द्वार का निर्माण कराया गया है।
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