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डॉक्टरों का आयाराम-गयाराम, मरीज हो रहे परेशान
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बहादराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों के इंतजार में बैठे मरीज ।
- फोटो : HARIDWAR
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रशासन और चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों के मर्ज पर भारी पड़ रही है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों का आरोप है कि यहां तैनात चिकित्सक न समय पर आते हैं और न तय समय तक ओपीडी में बैठते हैं। ऐसे में दूर दराज से आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार मरीजों को अस्पताल से निराश होकर लौटना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु करने और सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए शासन से आए दिन दिशा निर्देश दिए भी जाते हैं। इसके बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादराबाद के चिकित्सक लापरवाह बने हैं। अस्पताल में देरी से पहुंचना व समय से पहले अस्पताल छोड़ देना डॉक्टरों की आदत में शुमार हो गया है। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ। रोहालकी किशनपुर के अरुण कुमार ने बताया कि वह सुबह 8 बजे सीएचसी बहादराबाद पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। जबकि अस्पताल में कई चिकित्सकों की तैनाती है, लेकिन बुधवार को सुबह 9.15 बजे तक एक भी चिकित्सक व कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे थे। जिसके कारण उन्हें बिना इलाज कराए लौटना पड़ा। अलावलपुर की फूलमती ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से बैठी हूं। अभी तक डॉक्टर ही नहीं पहुंच सके हैं। नौ बजे तक पर्चा ही नहीं बना। डॉक्टर तो इलाज से कहां से करेंगे। मरीजों ने बताया कि डॉक्टर अक्सर 11 बजे ओपीडी में आते हैं और 12 बजे तक मरीजों को देखकर उठ जाते हैं। इसके बाद आने वाले मरीजों को भटककर लौटना पड़ता है।
लापरवाही से गर्भवती ने छोड़ा अस्पताल
मंगलवार की रात में सलेमपुर गांव निवासी ग्रामीण एक गर्भवती की डिलीवरी कराने के लिए अस्पताल में पहुंचे थे। महिला को डिलीवरी के लिए भर्ती तो कर लिया गया था। पर अलसुबह जब चार बजे उसकी तबीयत खराब होने लगी तो उसे कोई उपचार नहीं मिल सका। जिसके कारण उन्हें सरकारी अस्पताल छोड़कर निजी अस्पताल में जाना पड़ा।
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सीएमओ ने झाड़ा पल्ला
- डॉक्टरों के नहीं बैठने से मरीजों की ओर से इसकी शिकायत सीएमओ डॉक्टर कुमार खगेंद्र सिंह को फोन पर की गई। उन्हें अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अवगत कराकर कार्रवाई करने की मांग की गई। लेकिन उन्होंने भी चिकित्सा प्रभारी से बात करने के लिए कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
मुख्य गेट से लेकर परिसर में जगह-जगह गंदगी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। मुख्य गेट से लेकर भवन के अंदर तक जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। अस्पताल परिसर में लगा वाटर कूलर भी खराब पड़ा है। जिसके कारण शीतल पानी पीने के लिए भी मरीजों और तीमारदारों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु करने और सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए शासन से आए दिन दिशा निर्देश दिए भी जाते हैं। इसके बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादराबाद के चिकित्सक लापरवाह बने हैं। अस्पताल में देरी से पहुंचना व समय से पहले अस्पताल छोड़ देना डॉक्टरों की आदत में शुमार हो गया है। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ। रोहालकी किशनपुर के अरुण कुमार ने बताया कि वह सुबह 8 बजे सीएचसी बहादराबाद पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। जबकि अस्पताल में कई चिकित्सकों की तैनाती है, लेकिन बुधवार को सुबह 9.15 बजे तक एक भी चिकित्सक व कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे थे। जिसके कारण उन्हें बिना इलाज कराए लौटना पड़ा। अलावलपुर की फूलमती ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से बैठी हूं। अभी तक डॉक्टर ही नहीं पहुंच सके हैं। नौ बजे तक पर्चा ही नहीं बना। डॉक्टर तो इलाज से कहां से करेंगे। मरीजों ने बताया कि डॉक्टर अक्सर 11 बजे ओपीडी में आते हैं और 12 बजे तक मरीजों को देखकर उठ जाते हैं। इसके बाद आने वाले मरीजों को भटककर लौटना पड़ता है।
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लापरवाही से गर्भवती ने छोड़ा अस्पताल
मंगलवार की रात में सलेमपुर गांव निवासी ग्रामीण एक गर्भवती की डिलीवरी कराने के लिए अस्पताल में पहुंचे थे। महिला को डिलीवरी के लिए भर्ती तो कर लिया गया था। पर अलसुबह जब चार बजे उसकी तबीयत खराब होने लगी तो उसे कोई उपचार नहीं मिल सका। जिसके कारण उन्हें सरकारी अस्पताल छोड़कर निजी अस्पताल में जाना पड़ा।
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सीएमओ ने झाड़ा पल्ला
- डॉक्टरों के नहीं बैठने से मरीजों की ओर से इसकी शिकायत सीएमओ डॉक्टर कुमार खगेंद्र सिंह को फोन पर की गई। उन्हें अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अवगत कराकर कार्रवाई करने की मांग की गई। लेकिन उन्होंने भी चिकित्सा प्रभारी से बात करने के लिए कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
मुख्य गेट से लेकर परिसर में जगह-जगह गंदगी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। मुख्य गेट से लेकर भवन के अंदर तक जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। अस्पताल परिसर में लगा वाटर कूलर भी खराब पड़ा है। जिसके कारण शीतल पानी पीने के लिए भी मरीजों और तीमारदारों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।