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मंसा देवी की पहाड़ियों से ‘आफत’ बहा लाई बारिश

Sun, 03 Jul 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार Updated Sun, 03 Jul 2016 12:05 AM IST
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हरिद्वार। भारी बारिश से मंसा देवी की पहाड़ियों से हरिद्वार के प्रमुख बाजारों में मलबा घुसने से दिनभर दुकानदार और स्थानीय लोग परेशान रहे। जगह-जगह कीचड़ और फिसलने से यात्रियों की भी फजीहत हुई। मेयर व एमएनए के निर्देश पर नगर निगम के कर्मचारी शाम तक मलबा हटाने में जुटे रहे। इस दौरान मेयर व एमएनए परेशान लोगों को समस्या के समाधान का आश्वासन देते रहे।
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मंसा देवी पहाड़ी से मलबा आने से हिल बाईपास मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। सब्जी मंडी, रामघाट, विष्णुघाट और आसपास के बाजारों में दुकानों के सामने मलबा आने से अधिकतर दुकानें सुबह नहीं खुल पाई। दुकानदार और इनके कर्मचारी दोपहर तक मलबे हटाने में जुटे रहे। मंडी समिति के पूर्व चेयरमैन संजय चोपड़ा ने जिला प्रशासन व नगर निगम को दुकानदारों की समस्या से अवगत कराया। उसके बाद मेयर मनोज गर्ग कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने निगम अधिकारियों को अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर मलबा हटाने का काम शुरू करवाया। मुख्य नगर अधिकारी विप्रा त्रिवेदी ने भी बाजारों का निरीक्षण किया। इस दौरान व्यापारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन समय से कभी भी नहीं चेतता। इसलिए प्रत्येक बरसात में बाजारों में मलबा घुस आता है। व्यापार मंडल शहर अध्यक्ष संजीव नैयर और महामंत्री हरीश मल्होत्रा, शिवकुमार कश्यप, अनिरुद्ध भाटी आदि ने भी कहा कि अब भी यदि नालों की सफाई नहीं कराई तो आने वाली बारिश बाजारों में तबाही मचाएगी। होटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने विष्णु घाट और नालों की सफाई कराने की मांग की।
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पहली बारिश में हिली करोड़ों की योजना
हरिद्वार। मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी दी थी। हरिद्वार में बारिश तो सामान्य हुई, लेकिन उसके साइड इफेक्ट ज्यादा दिखाई दिए। पहली ही बारिश में अर्द्धकुंभ से पहले करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई महत्वपूर्ण योजना हिल बाईपास की नींव हिल गई। भूस्खलन के चलते इस मार्ग पर कीचड़ ही कीचड़ भर गया। मार्ग पर बड़े-बड़े पत्थर गिरने और मंसा देवी मार्ग से पहले हिल बाईपास मार्ग में दरारें पड़ गई। माना जा रहा है कि बेस हिलने के कारण यह दरारें आई हैं।
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जगह-जगह जलभराव, बंद हुई गंगनहर
भारी बारिश से मध्य हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर व हरकी पैड़ी क्षेत्र के मोती बाजार, उत्तरी हरिद्वार में भूपतवाला के निचले इलाकों में जलभराव होने से लोगों को शनिवार को भी परेशानी उठानी पड़ी। जबकि गंगा में सिल्ट आने से गंगनहर को बंद कर दिया है। गंगनहर में आने वाला पानी नीलधारा के रास्ते से निकाला जा रहा है। हालांकि गंगा में जलस्तर शुक्रवार के मुकाबले शनिवार को कुछ कम रहा। दोपहर में गंगा का जलस्तर 291.8 मीटर दर्ज किया गया। लेकिन भारी बारिश की चेतावनी पर जिला प्रशासन ने रविवार को भी तटीय इलाकों मेें अलर्ट जारी रखा। अपर जिलाधिकारी डा. अभिषेक त्रिपाठी, आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थितियां कंट्रोल में है।

बाढ़ चौकी खाली, घर में सो रहे थे कर्मी
प्रशासन ने बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए दावे तो बहुत किए हैं, लेकिन धरातल पर इनकी स्थिति क्या है इसकी पोल शनिवार को किए निरीक्षण में सामने आई। एडीएम डा. अभिषेक त्रिपाठी शुक्रवार रात बाढ़ चौकी का निरीक्षण करने निकले। उन्होंने भिक्कमपुर और रायसी बाढ़ चौकी का निरीक्षण किया। लेकिन दोनों चौकियों से कर्मचारी नदारद थे। डा. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि 23 जून को भी चार कर्मचारी चौकी से गायब थे। उनका वेतन रोक दिया गया था। शनिवार को भी नदारद कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए हैं। चेतावनी दी हीलाहवाली पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


92 परिवारों को विस्थापन का इंतजार
उत्तरी हरिद्वार में हर वर्ष बाढ़ कहर बरपाती है। वर्ष 2010 व 2013 में यहां हुई भारी तबाही के चलते भीमगोड़ा व नई बस्ती के 92 परिवारों के आवास स्थलों को खतरे की जद में मानते हुए उन्हें सुरक्षित जगह पर विस्थापित करने की संस्तुति प्रशासन ने की थी। लेकिन बरसात बीतते ही प्रशासनिक अधिकारी इस खतरे को भूल जाते हैं। फिर बरसात आती है तो सिर्फ फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक खिसकाने की औपचारिकताएं करके बरसात खत्म होने का इंतजार किया जाता है। पांस सालों में प्रशासन इस कवायद से आगे नहीं बढ़ पाया है। फलस्वरूप 92 परिवारों के विस्थापन की फाइल धूल फांक रही है। हालांकि इन परिवारों के कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो खतरे के बावजूद अपने घरों को छोड़कर नहीं जाना चाहते। जबकि कुछ विकल्प मिलने पर घर छोड़ने को तैयार हैं। भीमगोड़ा निवासी विपिन कुमार का कहना है प्रशासन बार बार दावे तो करता है लेकिन विस्थापन की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की। भूपेंद्र कुमार, मनीष जोशी का कहना है कि प्रशासन समुचित विकल्प दे तो वह अपना घर छोड़ने को तैयार हैं। अपर जिलाधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि इस बारे में जानकारी जुटाकर ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
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