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आज से योगनिद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा में चले जाते हैं। वे देवोत्थान एकादशी के दिन अपनी योग निद्रा से बाहर आते हैं। इन चार महीनों के दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। 14 नवंबर के बाद ही मांगलिक कार्य आरंभ होंगे। इस वर्ष 19 नवंबर से 13 दिसंबर तक कुल 12 लग्न हैं। इसके बाद अगले वर्ष 15 जनवरी 2022 के बाद शुभ मुहूर्त शुरू होगा।
देवशयनी एकादशी के साथ ही मंगलवार (आज) से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। 20 जुलाई से शुरू होने वाला चातुर्मास 14 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान मांगलिक और शुभ कार्य नहीं होंगे। विधि-विधान से भगवान का पूजन अर्चन करने से समस्त कष्टों का निवारण होगा। साधु-संत भी चार माह तक एक ही स्थान पर ठहरकर भगवान का ध्यान करेंगे।
देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को है। इस तिथि से मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि शुभ कार्यों पर चार माह तक विराम लग जाएगा। पंचांगों के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी मनाई जाता है। भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास की गणना होती है। वहीं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान एकादशी तक इसकी अवधि मानी जाती है। इसके कारण 14 नवंबर तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित हो जाएंगे। चातुर्मास में विधि-विधान से पूजन अर्चन करने से समस्त फलों की प्राप्ति होती है। इन विशेष मुहूर्त में दान व पूजा पाठ करने से कष्ट और रोगों से मुक्ति मिलती है।
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देवशयनी एकादशी के साथ ही मंगलवार (आज) से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। 20 जुलाई से शुरू होने वाला चातुर्मास 14 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान मांगलिक और शुभ कार्य नहीं होंगे। विधि-विधान से भगवान का पूजन अर्चन करने से समस्त कष्टों का निवारण होगा। साधु-संत भी चार माह तक एक ही स्थान पर ठहरकर भगवान का ध्यान करेंगे।
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देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को है। इस तिथि से मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि शुभ कार्यों पर चार माह तक विराम लग जाएगा। पंचांगों के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी मनाई जाता है। भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास की गणना होती है। वहीं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान एकादशी तक इसकी अवधि मानी जाती है। इसके कारण 14 नवंबर तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित हो जाएंगे। चातुर्मास में विधि-विधान से पूजन अर्चन करने से समस्त फलों की प्राप्ति होती है। इन विशेष मुहूर्त में दान व पूजा पाठ करने से कष्ट और रोगों से मुक्ति मिलती है।
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