फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Life is beautiful, don't die in anger, embrace your loved ones

खूबसूरत है जिंदगी, गुस्से में मौत नहीं अपनों को लगाएं गले

Fri, 01 Apr 2022 10:12 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 10:12 PM IST
विज्ञापन
Life is beautiful, don't die in anger, embrace your loved ones
मां-बाप जिगर के टुकड़ों के लिए मन में सुनहरे सपने संजोए हुए उनकी इच्छा पूरी करने में लगे रहते हैं। वहीं बच्चे खुदकुशी कर उनके दिलों को छलनी कर रहे हैं। युवाओं में सहनशीलता कम हो रही है। छोटी-छोटी बातों पर परिवार से गुस्सा होकर आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। जिले में पिछले तीन महीने में 60 लोगों ने जान दी। खास बात यह है कि इनमें 35 युवक-युवतियों भी शामिल हैं।
विज्ञापन

मनोचिकित्सक इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें युवाओं को समझाना होगा कि वह जीवन के प्रति सकारात्मक रहें। जीवन को जीने का सपना बुनें और गुस्से में अपनों को गला लगाए, मौत को नहीं। प्रतिस्पर्द्धा के दौर में लाइफ स्टाइल बदल गई हैं। पढ़ाई और करियर का अधिक दबाव है। परिवार में मन मुटाव है। लोग मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे हैं। इनमें हर उम्र और तबके से जुड़े लोग हैं। तनाव में जिंदगी से हारकर मौत को गले लगा रहे हैं। जिले में आत्महत्या के आंकड़ों से हर कोई हैरान है। तीन माह में 60 लोगों ने मौत को गले लगाया है। इनमें 35 युवक और युवतियां हैं। कई किशोर भी माता-पिता की डांट, मोबाइल और स्कूटी की डिमांड पूरी नहीं होने पर जान दे रहे हैं। कई घटनाएं प्रेम प्रसंग के भी सामने आए हैं। संवाद
विज्ञापन

बाहर के लोग भी करते हैं धर्मनगरी में आत्महत्या
स्थानीय लोगों के साथ ही धर्मनगरी में आने वाले श्रद्धालु भी आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाते हैं। धर्मनगरी में पिछले तीन माह में 11 लोगों ने होटलों, धर्मशालाओं और लॉज में आत्महत्या की है। इसके साथ ही तीन पुरुष और दो महिला ने गंगनहर के पुलों से कूदकर जान दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- आत्महत्या जैसा कदम उठाना एक पल का गुस्सा होता है। इसमें इंसान की सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। इसलिए उस क्षण के गुस्से पर काबू करना जरूरी है। परिवार के लोगों को चाहिए कि आपस में परेशानी को साझा करें। गुमसुम रहने वाले युवा आत्मघाती कदम ज्यादा उठाते हैं। परिवार के सदस्यों को उनकी गतिविधियों पर नजर रखकर दोस्त की तरह बात करनी चाहिए।

- डॉ. राकेश जैन, मनोचिकित्सा विभाग विभागाध्यक्ष गुरुकुल कांगड़ी विवि
परिजनों को युवाओं की समस्याएं सुननी चाहिए। डांटना किसी बात का हल नहीं होता है। बातों से समस्याओं का हल निकल सकता है। वहीं युवाओं को भी परिजनों की बात माननी चाहिए। क्यों कि परिजन हमेशा उनके हित की बात करते हैं।
- मनोज कात्याल, एसपी क्राइम, हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed