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मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से सूख रही आंसूओं की परत

Thu, 15 Jul 2021 11:48 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 11:48 PM IST
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Layer of tears drying due to continuous use of mobile
हरिद्वार। रात की जिस पहर में आंखों पर नींद का पहरा रहना चाहिए, आज सोशल मीडिया के बढ़ते चलन ने वहां नीली रोशनी का पहरा ला दिया है। एक वो दौर भी था जब रात को सोते वक्त अच्छी किताबें पढ़ने की सीख घर के बड़े बच्चों को दिया करते थे। आज बच्चे और बड़े हर कोई मोबाइल की दुनिया में खोए हैं। इससे बच्चों की आंखों की रोशनी भी अब धुंधली पड़ने लगी है। छात्रों में डिजिटल आई सिंड्रोम की समस्या होने लगी है। उनकी पुतलियों के ऊपर आंसुओं की परत सूख रही है।
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कोरोना संक्रमण की वजह से स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थानों में ऑनलाइन पढ़ाई जारी है। छात्र-छात्राएं मोबाइल, टैबलेट, लैपटाप और कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह व्यवस्था संक्रमण काल में घर बैठे पढ़ाई के लिहाज से बेहतर है, लेकिन इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। अमूमन दो से तीन घंटे की ऑनलाइन कक्षाओं के बाद छात्र रात-रात भर मोबाइल में गुजार रहे हैं। ऐसे में छात्रों में डिजिटल आई सिंड्रोम की समस्या होने लगी है। उनकी पुतलियों के ऊपर आंसुओं की परत सूख रही है। यह समस्या लगातार मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट देखने से होती है। जिला अस्पताल में रोजाना आठ से 10 केस डिजिटल आई सिंड्रोम के आ रहे हैं। इनमें आधे से अधिक संख्या स्कूली छात्रों की होती है। वहीं इंजीनियरिंग, मेडिकल या अन्य विषयों के छात्रों की भी यही स्थिति है। आंखों में जलन, दर्द, पानी आना, धुंधला दिखाई देना और नजर कमजोर होने की समस्या मिल रही है।
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मोबाइल से ज्यादा दिक्कतें
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुव्रत अरोरा ने बताया कि मोबाइल से ज्यादा दिक्कतें हैं। कारण, एक तो उसका छोटा आकार है, दूसरा बच्चे पढ़ाई के साथ ही ऑनलाइन गेम खेलने या फिर कार्टून देखने लग जाते हैं। स्क्रीन के छोटे आकार की वजह से उनकी आंखों और पुतलियों पर ज्यादा असर पड़ता है।
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20-20 का फार्मूूला कारगर
चिकित्सकों के मुताबिक समस्या से बचने के लिए 20-20 का फार्मूला अपनाना चाहिए। 20 मिनट स्क्रीन पर देखने के बाद 20 फीट की दूरी पर कम से कम 20 सेकेंड तक देखना चाहिए। इससे आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है।

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पढ़ाई के लिए निश्चित हो दूरी
नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. सुव्रत अरोरा ने बताया कि पढ़ाई करते समय मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की निश्चित दूरी होनी चाहिए। प्रारंभिक समस्या होने पर डॉक्टरों को तुरंत दिखाना चाहिए।
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