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तपस्वी युगांतकारी संत थे जगद्गुरू रामानंदाचार्य महारा: रविन्द्रपुरी

Mon, 24 Jan 2022 08:45 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 08:45 PM IST
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Jagadguru Ramanandacharya was an ascetic saint: Ravindrapuri
जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज की जयंती पर मध्य हरिद्वार स्थित श्री रामानंद आश्रम आचार्य महापीठ में संत समाज ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर आरती कर विश्व कल्याण की कामना की।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि भक्ति आंदोलन के प्रणेता एवं श्री रामानंद संप्रदाय के प्रवर्तक जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य परम तपस्वी युगांतकारी दार्शनिक एवं समन्वयवादी संत थे। उन्होंने समाज से जातपात और ऊंच नीच का भेदभाव समाप्त कर समरसता का संदेश दिया। राष्ट्र निर्माण में ऐसे महापुरुषों का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज ने भारतीय वैष्णव भक्ति धारा को पुनर्गठित किया। महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि एवं महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज वैष्णव भक्ति धारा के महान संत थे। उन्होंने वैष्णों साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया। वह पहले ऐसे आचार्य हुए जिन्होंने उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार प्रसार किया और वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की। श्रीमहंत विष्णु दास एवं बाबा बलराम दास हठयोगी ने कहा कि जब समाज में चारों ओर आपसी कटुता और वैमनस्य का भाव भरा हुआ था, ऐसे समय में जगदगुरु स्वामी रामानंद ने भक्ति करने वालों के लिए नारा दिया। रामानंद आश्रम के महंत प्रेमदास एवं महामंडलेश्वर स्वामी राजेंद्रानंद ने कहा कि जगदगुरु स्वामी रामानंद ने भक्ति मार्ग का प्रचार करने के लिए देश भर की यात्राएं कीं। महंत प्रहलाद दास एवं महामण्डलेश्वर स्वामी कपिल मुनि ने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज का जीवन वैष्णव संत ही नहीं अपितु सर्व समाज के लिए एक आदर्श है। इस अवसर पर पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, महंत जसविन्दर सिंह, महंत देवानंद सरस्वती, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महंत सुतीक्ष्ण मुनि, महंत सूरज दास, महंत अरुण दास आदि मौजूद थे।
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