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अध्यात्म से ही मानव का ह्रदय परिवर्तित हो सकता है : महाराज
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आध्यात्मिक गुरु व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का जन्मोत्सव अनुयायियों ने सद्भावना सम्मेलन के रूप में मनाया। बीएचईएल में स्थित दशहरा मैदान श्री प्रेमनगर आश्रम की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि हमारा देश तो राम कृष्ण का है। इस देश में हमेशा अहिंसा की बात की गई है, शांति की बात की गई है। इसी राम कृष्ण के देश से बुद्ध, महावीर व अनेक संतों ने शांति की आवाज उठाई। वह आध्यात्मवाद की आवाज फिर से गूंजनी चाहिए, इससे सारा भूमंडल सुख व शांति से आगे बढ़े।
सतपाल महाराज ने कहा कि इस कलिकाल के अंदर, इस विषम परिस्थिति के अंदर एक भयानक विनाश का रोग लग गया है। इसका निदान केवल मात्र अध्यात्म ही है। अध्यात्म से ही मानव के हृदय का परिवर्तन संभव है। जब मानव का हृदय बदलेगा तो समाज में भाईचारा, सहिष्णुता, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, सद्भावना आदि पल्लवित होगी।
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महाराज ने कहा कि आज का मानव केवल तबाही मचाने में लगा हुआ है। आज हम कितना विनाश कर सकते हैं, वह विनाश करने की क्षमता हमारी शक्ति बन गई है, जबकि शक्ति तो उसे कहा जाता है जो कुछ अच्छा कर दे, जिससे मानव समाज का भला हो, जिससे मानव का हृदय परिवर्तन हो और सद्भावना समस्त वसुधा पर फैले।
कार्यक्रम से पूर्व सतपाल महाराज ने माता अमृता व अन्य विभूतियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संत-महात्माओं ने अपने विचार रखे। भजन गायकों ने महाराज को जन्मदिन की बधाई दी। मंच का संचालन महात्मा हरि संतोषानंद ने किया।
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श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि हमारा देश तो राम कृष्ण का है। इस देश में हमेशा अहिंसा की बात की गई है, शांति की बात की गई है। इसी राम कृष्ण के देश से बुद्ध, महावीर व अनेक संतों ने शांति की आवाज उठाई। वह आध्यात्मवाद की आवाज फिर से गूंजनी चाहिए, इससे सारा भूमंडल सुख व शांति से आगे बढ़े।
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सतपाल महाराज ने कहा कि इस कलिकाल के अंदर, इस विषम परिस्थिति के अंदर एक भयानक विनाश का रोग लग गया है। इसका निदान केवल मात्र अध्यात्म ही है। अध्यात्म से ही मानव के हृदय का परिवर्तन संभव है। जब मानव का हृदय बदलेगा तो समाज में भाईचारा, सहिष्णुता, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, सद्भावना आदि पल्लवित होगी।
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महाराज ने कहा कि आज का मानव केवल तबाही मचाने में लगा हुआ है। आज हम कितना विनाश कर सकते हैं, वह विनाश करने की क्षमता हमारी शक्ति बन गई है, जबकि शक्ति तो उसे कहा जाता है जो कुछ अच्छा कर दे, जिससे मानव समाज का भला हो, जिससे मानव का हृदय परिवर्तन हो और सद्भावना समस्त वसुधा पर फैले।
कार्यक्रम से पूर्व सतपाल महाराज ने माता अमृता व अन्य विभूतियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संत-महात्माओं ने अपने विचार रखे। भजन गायकों ने महाराज को जन्मदिन की बधाई दी। मंच का संचालन महात्मा हरि संतोषानंद ने किया।