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विश्व एड्स दिवस:हौसले से दे रहे एचआईवी को मात
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दिल में जिंदगी जीने की ललक हो तो टूटती सांसों को भी फिर से संभाला जा सकता है। सोच से शरीर की बिगड़ी अवस्था को फिर संवारा जा सकता है। यही सोच और ललक जीवन को हर पल मौत के मुहाने पर ले जाते संक्रमण एचआइवी को भी मात दे सकती है। परिस्थितियां बदलीं तो घातक संक्रमण से शरीर ग्रस्त हुआ लेकिन उन्हीं विपरीत परिस्थितियों को सकारात्मकता से ऐसा बना दिया कि जीवन की नई किलकारियां गूंज उठीं।
आज विश्व एड्स दिवस है। पूरे जिले में 118 लोग एचआईवी से ग्रसित है। जिनमें 46 मेल, 22 फीमेल है। इसके साथ ही दो ट्रांसजेंडर व 27 ऐसे मरीज हैं, जिसकी वर्तमान में डॉटस सेंटर में एंटीरेट्रोवाइरल (एआरटी) थैरैपी चल रही है। इनमें लाइलाज रोग एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिसियेंसी सिंड्रोम) से जूझ रही 4 महिलाओं के आंगन में अब बच्चों की किलकारी भी गूंजने वाली है। डॉटस सेंटर के प्रभारी डॉक्टर शादाब सिद्दीकी ने बताया कि वर्तमान में एक ट्रक ड्राइवर का इलाज भी चल रहा है। उन्होंने बताया की एड्स की रोकथाम व जांच करने के लिए छह टीआई भी लगाए हुए हैं। जो अलग-अलग स्थानों पर जाकर जांच करते हैं।
समलैंगिक भी एचआइवी की चपेट में
समलैंगिक भी एचआइवी के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। डॉटस सेंटर में दो समलैंगिक का इलाज चल रहा है। ये वर्षों से एक साथ रह रहे हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा है। इनसे किसी दूसरे को संक्रमण न हो, इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
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बीमारी के बारे में खुलकर बात करते हैं पीड़ित
डॉ. शादाब सिद्दीकी ने बताया कि जिंदगी के अरमानों को तोड़कर रख देने वाली एड्स बीमारी को साथ लेकर भी लोग जीवन जी रहे हैं। वे खुश हैं या नहीं इसका तो पता नहीं, लेकिन एड्स के बारे में खुलकर बात करते हैं। सरकार से मिल रहे उपचार ने उन्हें हौसला दिया है और घर परिवार के लोगों ने जीवन जीने का सहारा।
एचआईवी पॉजीटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना
- लगातार दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- हरपीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों और हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- सांस की बीमारी एवं निमोनिया
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आज विश्व एड्स दिवस है। पूरे जिले में 118 लोग एचआईवी से ग्रसित है। जिनमें 46 मेल, 22 फीमेल है। इसके साथ ही दो ट्रांसजेंडर व 27 ऐसे मरीज हैं, जिसकी वर्तमान में डॉटस सेंटर में एंटीरेट्रोवाइरल (एआरटी) थैरैपी चल रही है। इनमें लाइलाज रोग एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिसियेंसी सिंड्रोम) से जूझ रही 4 महिलाओं के आंगन में अब बच्चों की किलकारी भी गूंजने वाली है। डॉटस सेंटर के प्रभारी डॉक्टर शादाब सिद्दीकी ने बताया कि वर्तमान में एक ट्रक ड्राइवर का इलाज भी चल रहा है। उन्होंने बताया की एड्स की रोकथाम व जांच करने के लिए छह टीआई भी लगाए हुए हैं। जो अलग-अलग स्थानों पर जाकर जांच करते हैं।
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समलैंगिक भी एचआइवी की चपेट में
समलैंगिक भी एचआइवी के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। डॉटस सेंटर में दो समलैंगिक का इलाज चल रहा है। ये वर्षों से एक साथ रह रहे हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा है। इनसे किसी दूसरे को संक्रमण न हो, इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
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बीमारी के बारे में खुलकर बात करते हैं पीड़ित
डॉ. शादाब सिद्दीकी ने बताया कि जिंदगी के अरमानों को तोड़कर रख देने वाली एड्स बीमारी को साथ लेकर भी लोग जीवन जी रहे हैं। वे खुश हैं या नहीं इसका तो पता नहीं, लेकिन एड्स के बारे में खुलकर बात करते हैं। सरकार से मिल रहे उपचार ने उन्हें हौसला दिया है और घर परिवार के लोगों ने जीवन जीने का सहारा।
एचआईवी पॉजीटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना
- लगातार दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- हरपीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों और हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- सांस की बीमारी एवं निमोनिया