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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Her complaint, own dignity forgotten

उनसे शिकायत, खुद गरिमा भूल गए

Wed, 13 Jan 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 13 Jan 2016 12:14 AM IST
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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेले के तहत मंगलवार को लोकार्पित किए गए करोड़ों
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रुपयों के निर्माण कार्यों के शिलापट पर राज्य सरकार की ओर से उन विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को तो पूरा सम्मान दिया गया जहां निर्माण कार्य कराए जाने हैं लेकिन सांसदों का शिलापट पर कहीं नाम तक नहीं है। जबकि वर्ष 2010 के कुंभ मेले के दौरान ऐसा ही रवैया अपनाने पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और हरिद्वार के सांसद हरीश रावत और उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई थी। अब खुद मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत सांसद को भूल गए। एक बार फिर इन निर्माण कार्यों को लेकर वर्ष 2010 की तरह ही राजनीति गरमाने के आसार नजर आ रहे हैं।
मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार, हरिद्वार ग्रामीण, रानीपुर, नरेंद्रनगर, ऋषिकेश, पौड़ी आदि विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत कराए गए कार्यों का लोकार्पण किया। इस दौरान जो शिलापट दर्शाए गए उनमें सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों, मदन कौशिक, स्वामी यतीश्वरानंद, आदेश चौहान, प्रेमचंद अग्रवाल, सुबोध उनियाल आदि का तो क्षेत्र के हिसाब से ख्याल रखा गया है लेकिन क्षेत्रीय सांसद हरिद्वार के रमेश पोखरियाल निशंक, पौड़ी से भुवनचंद खंडूरी और टिहरी की माला राज्यलक्ष्मी का नाम कहीं नहीं है। जबकि वर्ष 2010 में मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद हरिद्वार के सांसद एवं केंद्र सरकार में मंत्री थे उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पर उन्होंने और उनके समर्थकों ने सांसद पद की गरिमा का ख्याल नहीं रखने के आरोप लगाए थे। इसके विरोध में रावत समर्थकों ने हथौड़े लेकर निर्माण कार्यों के शिलापट तक तोड़ने शुरू किए थे। इसके आरोप में पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, सेवादल के नेता राजेश रस्तौगी, राजीव चौधरी आदि के खिलाफ तो अब तक भी मुकदमा चल रहा है। अब हरीश रावत के खुद सीएम रहते हुए किसी भी शिलापट पर सांसद का नाम नदारद है। लिहाजा दोबारा ऐसा ही विवाद खड़ा होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। 

बुलाने पर भी नहीं आए: जमदग्नि
सांसद प्रतिनिधि ओमप्रकाश जमदग्नि ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। सांसद के रूप में हरीश रावत को वर्ष 2010 में सभी जगह आमंत्रित किया जाता था लेकिन वे आते नहीं थे। इसलिए उनका नाम शिलापटों पर नहीं लिखा गया था। लेकिन राज्य सरकार की ओर से सांसदों को कहीं नहीं बुलाया जा रहा है।

अर्द्धकुंभ के लिए मदद नहीं दी: पुरुषोत्तम
मुख्यमंत्री के ओएसडी पुरुषोत्तम शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से अर्द्धकुंभ मेले के लिए कोई मदद नहीं दी गई। पहले तो केंद्र के प्रतिनिधि के नाते भाजपा के सांसदों को यह जवाब देना चाहिए कि मेले के लिए उन्होंने क्या दायित्व निभाया। सांसद के रूप में हरीश रावत ने सात सौ करोड़ से भी ज्यादा की मदद केंद्र से दिलवाई थी। लेकिन निशंक इस मामले में कतई कारगर सिद्ध नहीं हो सके।
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