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पहाड़ की बारिश से बढ़ी मैदानी क्ष्ाेत्र की धड़कन
ब्यूरो, अमर उजाला/रुड़की
Updated Fri, 26 Jun 2015 01:21 AM IST
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बुधवार की रात से पहाड़ों में हो रही बारिश के बाद गंगा और सोलानी नदी में पानी बढ़ने लगा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही घाड़ से लेकर खादर तक बसे हजारों लोगों की धड़कने बढ़ने लगी हैं। सबसे ज्यादा चिंता का कारण पिछले सालों में बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुए तटबंधों का निर्माण पूरा नहीं होना है।
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सोपरी के पास गंगा में पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर दिखने लगा है। हालांकि अभी पानी का स्तर खतरे से काफी नीचे होकर बह रहा है। लेकिन अगले कुछ दिन बारिश का क्रम जारी रहा तो यह बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
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बरसात में हर साल गंगा खादर और सोलानी घाड़ से लेकर खादर तक तबाही मचाती हैं।
सोलानी नदी भगवानपुर के घाड़ क्षेत्र से तबाही मचाने लगती है। गंगा खादर के गांवों को अपने चपेट में ले लेती है। वर्ष 2013 और 2014 में नदियों ने क्षेत्र में जमकर कहर बरपाया। गंगा का पानी हर साल खादर क्षेत्र के करीब 40 गांवों को अपनी चपेट में ले लेता है।
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2013 में तो खादर क्षेत्र के कई गांवों के सैकड़ों परिवारों गांव अपना घर छोड़कर पथरी के जंगलों में शरण लेनी पड़ी थी। ग्रामीण कई महीनों बाद यहां से लौटे थे। तब गंगा के किनारे सोपरी तटबंध टूटने से यह स्थिति बनी थी। तब से इस तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो सका। पिछले साल भी यहीं से पानी गांवों में घुसा था।
तटबंध निर्माण का काम पूरा नहीं होने के चलते इस बार भी कमोबेश ऐसे ही हालात दिखाई दे रहे हैं। जिसके चलते लोगों को बाढ़ का खतरा डराने लगा है। ज्यादा खतरा पहाड़ों पर हो रही बारिश से हैं। सबसे पहले यहां की गंगा और सोलानी नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। तेज वेग के कारण ये नदियां तटबंध तोड़कर खेत खलिहान की ओर रुख करती है।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन के पास बाढ़ के दौरान होने वाली तबाही को रोकने के लिए कोई ठोस संसाधन नहीं है। इस दौरान होने वाले राहत बचाव कार्य में लोगों की जान तो बचा ली जाती है लेकिन घर सहित उनमें रखा सामान और फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है।
नदी और जंगलों पर मानवीय प्रहार का परिणाम
नदियों और जंगलों पर मानवीय अत्याचारों से कराह रही प्रकृति का रुदन हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ में तब्दील हो रहा है। नदियों का अवैध खनन भी बाढ़ का कारण बनता है। नदियों के किनारों को खोदने के चलते पानी अपना रुख बदल देता है। नदियों के किनारों को भारी मशीनों से खोदा जा रहा है। नदियों के किनारे खड़े पेड़ धराशायी हो रहे हैं।
नतीजतन गहरी हो चुकी नदियों में जब पानी आता है तो इसका बढ़ता वेग न तटबंधों को कुछ समझता है और न ही गांवों की सीमाओं को। 16 जून 2013 को जब नदियों उफनी तो कुछ इसी तरह तबाही का मंजर देखने को मिला।
चौकियां खोली
तहसील प्रशासन ने क्षेत्र के भिक्कमपुर, सुल्तानपुर, रायसी और गोवर्धनपुर में बाढ़ चौकियां खोली हैं। अभी यहां कर्मचारियों की तैनाती नहीं हुई है। लेकिन इन चौकियों पर पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं। इससे कोई बहुत मदद नहीं मिलती। यहां तैनात कर्मचारी सिर्फ लोगों को सचेत करने और प्रशासन तक सूचना पहुंचाने का काम ही करते हैं।
यह गांव होते हैं प्रभावित
फतवा, रामपुर रायघटी, जसपुर, रणजीतपुर, गंगादासपुर, गंगदासपुर, पंडितपुरी, शेरपुर बेला, सौपरी और महाराजपुर कला खुर्द, डुमनपुरी, कलसिया, बहराबाद, गिद्दावाली, नंदपुर, रायसी, कुड़ी भगवानपुर डेरा, नाइवाला, दल्लेवाला चंद्रपुरी, माडाबेला।
मुश्तैदी के साथ करें ड्यूटी
एसडीएम मंगेश घिल्डियाल ने बाढ़ राहत कार्यों को लेकर ब्लाक सभागार में स्वास्थ्य, पुलिस, विद्युत, पशुधन, पंचायत विभाग के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों, राशन डीलरों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि मानसून आ गया हैै। इसलिए सभी को चौकन्ना रहने की जरूरत है, ताकि नदियों में आने वाली बाढ़ से किसी को भी नुकसान नहीं हो सके।
उन्होंने अधिकारियों को कर्मचारियों को बाढ़ राहत चौकियों पर 24 घंटे मुश्तैदी के साथ तैनात करने के निर्देश दिए। कहा कि लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर तहसीलदार प्रकाश शाह, सीओ बहादुर सिंह चौहान, बीडीओ आईएस भंडारी, कमल कुमार।
डिप्टी सीएमओ अनिल वर्मा, एसडीओ अंजीव कुमार, व्यापार मंडल अध्यक्ष अतुल गुप्ता आदि मौजूद।