हरिद्वार: मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर 10 हजार जुर्माना, कुंभ कलश स्थल के अवैध निर्माण की सूचना में 16 माह देरी
कुंभ मेला कलश स्थल की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण से जुड़े मामले में सूचना देने में हुई देरी पर राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मामले में सूचना के अधिकार से जुड़े प्रावधानों और अपने आदेश के अनुपालन में लापरवाही मानते हुए मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर जुर्माना लगाया है।
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सूचना आयुक्त ने हरिद्वार के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशीष वर्मा पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना कुंभ मेला कलश स्थल पर हुए अवैध निर्माण से संबंधित जानकारी 16 माह देर से देने पर लगा। इसमें सूचना अधिकार के प्रावधानों और आयोग के आदेशों का खुला उल्लंघन पाया गया है।
राष्ट्रीय सूचना अधिकार जागृति मिशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने 7 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। शिकायत में कुंभ कलश की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप था। रमेश चंद्र शर्मा ने आरोप लगाया था कि भागीरथी होटल के ठेकेदारों ने अवैध खनन के पत्थरों से निर्माण कर हरियाली को नुकसान पहुंचाया गया। इसमें टीनशेड और दो विद्युत ट्रांसफार्मर भी रखे गए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया। अपर सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय जगदीश चंद्र कंडपाल ने 14 फरवरी 2024 को जिलाधिकारी को लिखित आदेश भेजा।
सीएम हेल्पलाइन पर भी इस मामले की जांच दर्ज की गई थी। रमेश चंद्र शर्मा ने 20 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय में सूचना आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने अवैध कब्जा हटाने के लिए शासन स्तर से की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
एक नहीं कई बार नियमों की हुई अनदेखी
मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह आवेदन 23 फरवरी 2024 को जिलाधिकारी कार्यालय को अग्रसारित कर दिया। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशीष वर्मा ने सूचना देने में 23 दिन का फिर से विलंब किया। उन्होंने आवेदन को उपजिलाधिकारी हरिद्वार को भेज दिया। उपजिलाधिकारी अजय वीर सिंह ने भी बिना सूचना दिए आवेदन को प्रशासनिक अधिकारी तहसील हरिद्वार भेज दिया।
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सूचना न मिलने पर रमेश चंद्र शर्मा ने 3 जनवरी 2025 को प्रथम अपील दायर की। इसके बाद 20 जून 2025 को उन्होंने सूचना आयोग में द्वितीय अपील दर्ज कराई। सुनवाई के बाद सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने 20 नवंबर 2025 को आशीष वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस का जवाब न देने और आयोग के अंतरिम आदेशों का पालन न करने पर 7 सितंबर 2026 को 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।