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वन विकास निगम को काली सूची में डाले सरकार: शिवानंद
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मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड वन विकास निगम पर्यावरण को बचाने के लिए है, पर वह उसे मिटाने पर लगा हुआ है। माफिया से मिलकर अवैध रूप से धड़ल्ले के साथ खनन कर रहा है। जिससे गंगा की दशा और दिशा दोनों बदल रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड विकास निगम को काली सूची में डालकर अवैध खनन की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
जगजीतपुर स्थित मातृ सदन आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि रायवाला से लेकर भोगपुर तक गंगा में खनन और स्टोन क्रशर से लेकर अन्य खनन संबंधी सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक है। पर इसके बावजूद अवैध खनन कराने के लिए अधिकारी और सरकार नए-नए हथकंडे निकालती रहती है। जिसमें उत्तराखंड वन विकास निगम को भी खनन कराने का ठेका दे दिया जाता है। यह पूरी तरीके से एक सुनियोजित योजना रहती है। जिससे वन विकास निगम की ओर से नवंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच बिशनपुर, श्यामपुर, भोगपुर, चिड़ियापुर में जमकर अवैध खनन कराया गया। इसमें नियम-कानूनों को भी ताक पर रखकर बड़ी-बड़ी मशीनों से भीषण खनन कराया गया।
खनन के लिए बाईपास रोड तैयार किए गए। जिनके माध्यम से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, डंपर आदि वाहनों से एक-एक रवन्ने पर अनेक बार खनन सामग्री ढोई गई। स्टोन क्रशरों पर भी अवैध रूप से खनिज सामग्री की ठिकाने लगाई। इस भीषण खनन से गंगा में बहुत सारे द्वीप नष्ट हुए। इन द्वीपों के नष्ट होने से गंगा की सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। इसको लेकर भी जांच की जाए कि निगम की ओर से कराए गए खनन से कितने द्वीप नष्ट हुए हैं। इसके लिए तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जाए। ताकि दोषियों को सजा मिल सके। कहा कि अवैध खनन कराने वाले डीएम और खनन सचिव समेत अन्य के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने इन सब विषयों को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र भी भेजा है।
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जगजीतपुर स्थित मातृ सदन आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि रायवाला से लेकर भोगपुर तक गंगा में खनन और स्टोन क्रशर से लेकर अन्य खनन संबंधी सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक है। पर इसके बावजूद अवैध खनन कराने के लिए अधिकारी और सरकार नए-नए हथकंडे निकालती रहती है। जिसमें उत्तराखंड वन विकास निगम को भी खनन कराने का ठेका दे दिया जाता है। यह पूरी तरीके से एक सुनियोजित योजना रहती है। जिससे वन विकास निगम की ओर से नवंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच बिशनपुर, श्यामपुर, भोगपुर, चिड़ियापुर में जमकर अवैध खनन कराया गया। इसमें नियम-कानूनों को भी ताक पर रखकर बड़ी-बड़ी मशीनों से भीषण खनन कराया गया।
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खनन के लिए बाईपास रोड तैयार किए गए। जिनके माध्यम से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, डंपर आदि वाहनों से एक-एक रवन्ने पर अनेक बार खनन सामग्री ढोई गई। स्टोन क्रशरों पर भी अवैध रूप से खनिज सामग्री की ठिकाने लगाई। इस भीषण खनन से गंगा में बहुत सारे द्वीप नष्ट हुए। इन द्वीपों के नष्ट होने से गंगा की सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। इसको लेकर भी जांच की जाए कि निगम की ओर से कराए गए खनन से कितने द्वीप नष्ट हुए हैं। इसके लिए तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जाए। ताकि दोषियों को सजा मिल सके। कहा कि अवैध खनन कराने वाले डीएम और खनन सचिव समेत अन्य के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने इन सब विषयों को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र भी भेजा है।
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