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संस्कृत विवि में सवालों के बीच नियुक्तियां फाइनल
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 27 Aug 2016 10:28 PM IST
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उत्तराखंड विश्वविद्यालय में नियुक्ति प्रक्रिया पर उठते सवालों के बीच शनिवार को कार्यपरिषद ने साक्षात्कार परिणाम पर मुहर लगा दी। बैठक चंद मिनट में ही संपन्न हो गई। अभ्यर्थियों और छात्रसंघ की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाने का सिलसिला जारी है।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में पिछले महीने सहायक आचार्य, सह आचार्य व आचार्य पदों के 39 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी। साक्षात्कार शुरू होते ही अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इस बारे में कई शिकायतें राज्यपाल को भेजी गई। वहीं विवि के छात्रसंघ ने भी आरोपों को दोहराते हुए जांच की मांग की थी। तमाम सवालों के बीच साक्षात्कार प्रक्रिया आखिरकार पूरी कर ली गई। साक्षात्कार में सामने आए परिणामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए शनिवार को कार्यपरिषद की बैठक बुलाई गई। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुई कार्यपरिषद की बैठक में आरोप- प्रत्यारोप और जांच की मांग पर कोई विचार ही नहीं किया गया। नतीजतन बैठक चंद मिनट में ही संपन्न हो गई। बैठक में साक्षात्कार परिणाम के लिफाफे खोलकर उन पर विचार विमर्श किया गया। वहीं कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है।
साक्षात्कार की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है। उन्होंने बताया कि परिणाम सोमवार- मंगलवार तक जारी कर दिए जाएंगे। बैठक में कुलसचिव प्रो. गिरीश चंद्र अवस्थी, वित्ताधिकारी तंजीम अली, भगवानदास आदर्श महाविद्यालय के प्राचार्य भोला झा सहित नामित सदस्य शामिल रहे।
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छात्रसंघ ने मांगे दस्तावेज
हरिद्वार। संस्कृत विवि में कार्यपरिषद की बैठक के दौरान छात्रसंघ ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा। उन्हाेंने नियुक्ति को लेकर गड़बड़ी के आरोप दोहराते हुए अभ्यर्थियों के दस्तावेज भी मांगे गए। तीन दिन में सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी गई। छात्रसंघ अध्यक्ष अनूप बहुखंडी ने कहा कि पिछले नियुक्तियों में गड़बड़ी की बात जांच में साफ हो चुकी है। जिससे विश्वविद्यालय की छवि पहले भी काफी धूमिल हुई है। कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने छात्रों को जांच का भरोसा दिलाया।
बाहर जितना हल्ला, अंदर उतना सन्नाटा
संस्कृत विवि में नियुक्तियों को लेकर बाहर जितना हो हल्ला मचा है, विवि के भीतर उतना ही सन्नाटा है। शनिवार को कार्यपरिषद की बैठक के दौरान भी विवि मेें पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। विवि में दूसरी मंजिल पर कुछ छात्र संगीत का अभ्यास करते जरूर दिखे। विवि के अधिकांश व्याख्यान कक्षों पर ताला लटका नजर आया।
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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में पिछले महीने सहायक आचार्य, सह आचार्य व आचार्य पदों के 39 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी। साक्षात्कार शुरू होते ही अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इस बारे में कई शिकायतें राज्यपाल को भेजी गई। वहीं विवि के छात्रसंघ ने भी आरोपों को दोहराते हुए जांच की मांग की थी। तमाम सवालों के बीच साक्षात्कार प्रक्रिया आखिरकार पूरी कर ली गई। साक्षात्कार में सामने आए परिणामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए शनिवार को कार्यपरिषद की बैठक बुलाई गई। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुई कार्यपरिषद की बैठक में आरोप- प्रत्यारोप और जांच की मांग पर कोई विचार ही नहीं किया गया। नतीजतन बैठक चंद मिनट में ही संपन्न हो गई। बैठक में साक्षात्कार परिणाम के लिफाफे खोलकर उन पर विचार विमर्श किया गया। वहीं कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है।
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साक्षात्कार की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है। उन्होंने बताया कि परिणाम सोमवार- मंगलवार तक जारी कर दिए जाएंगे। बैठक में कुलसचिव प्रो. गिरीश चंद्र अवस्थी, वित्ताधिकारी तंजीम अली, भगवानदास आदर्श महाविद्यालय के प्राचार्य भोला झा सहित नामित सदस्य शामिल रहे।
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छात्रसंघ ने मांगे दस्तावेज
हरिद्वार। संस्कृत विवि में कार्यपरिषद की बैठक के दौरान छात्रसंघ ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा। उन्हाेंने नियुक्ति को लेकर गड़बड़ी के आरोप दोहराते हुए अभ्यर्थियों के दस्तावेज भी मांगे गए। तीन दिन में सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी गई। छात्रसंघ अध्यक्ष अनूप बहुखंडी ने कहा कि पिछले नियुक्तियों में गड़बड़ी की बात जांच में साफ हो चुकी है। जिससे विश्वविद्यालय की छवि पहले भी काफी धूमिल हुई है। कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने छात्रों को जांच का भरोसा दिलाया।
बाहर जितना हल्ला, अंदर उतना सन्नाटा
संस्कृत विवि में नियुक्तियों को लेकर बाहर जितना हो हल्ला मचा है, विवि के भीतर उतना ही सन्नाटा है। शनिवार को कार्यपरिषद की बैठक के दौरान भी विवि मेें पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। विवि में दूसरी मंजिल पर कुछ छात्र संगीत का अभ्यास करते जरूर दिखे। विवि के अधिकांश व्याख्यान कक्षों पर ताला लटका नजर आया।