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पांच सौ होटलों के कर्मी आर्थिक सहायता से होंगे वंचित
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जनपद के पांच सौ होटलों के कर्मचारियों को सरकार की ओर से दी जानी सहायता नहीं मिल पाएगी। होटलों का पंजीकरण न होने से संचालक अपने कर्मियों को पांच-पांच हजार रुपये सरकारी आर्थिक सहायता दिलाने के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।
कोविड काल में होटल व्यवसाय पूरी तरह ठप चल रहा है। लगभग सवा साल से होटल संचालकों की हालत खराब है। ऐसे में सरकार की ओर से होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को ढाई हजार रुपये प्रति महीने की दर से एक मुश्त में दो माह की राशि पांच-पांच हजार रुपए दिए जाने हैं। यह राशि उन्हीं कर्मचारियों को मिलनी है, जिन होटलों के कर्मचारी उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय नियमावली में पंजीकृत होंगे। जनपद में करीब छह सौ होटल संचालित हैं। इनमें से महज 108 होटल ही नियमावली में पंजीकृत हैं। करीब पांच सौ के आसपास होटल बिना पंजीकृत के ही चल रहे हैं। पर्यटन विभाग के नोटिसों के बावजूद भी होटलों का पंजीकरण नहीं कराया। इसका खामियाजा अब बिना पंजीकृत होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को भुगतान पड़ेगा। पंजीकरण नहीं होने से ये कर्मचारी योजना से बाहर रह जाएंगे।
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ऑनलाइन करना होगा आवेदन
होटल कर्मचारियों को आर्थिक सहायता का लाभ दिलाने के लिए होटल स्वामियों को उनका आवेदन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन करना होगा। इसके बाद जिला पर्यटन विकास कार्यालय की ओर से आवेदनों को स्वीकृत करने के बाद कर्मचारियों के बैंक खातों में सीधा पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
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कुलियों-रिक्शा चालकों को भी मिलेगा लाभ
आर्थिक सहायता योजना का लाभ नगर निगम में पंजीकृत रिक्शा चालकों और कुलियों को भी लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार नगर निगम में पंजीकृत रिक्शा चालक और कुली योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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कोरोना संक्रमण काल में पंजीकृत होटलों के कर्मचारियों को ही योजना का लाभ मिल सकेगा। इससे ऐसे होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को काफी राहत मिल सकेगी, लेकिन जिन होटल संचालकों ने आज तक पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें योजना का कोई लाभ नहीं दिया जाएगा।
- सीमा नौटियाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, हरिद्वार
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कोविड काल में होटल व्यवसाय पूरी तरह ठप चल रहा है। लगभग सवा साल से होटल संचालकों की हालत खराब है। ऐसे में सरकार की ओर से होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को ढाई हजार रुपये प्रति महीने की दर से एक मुश्त में दो माह की राशि पांच-पांच हजार रुपए दिए जाने हैं। यह राशि उन्हीं कर्मचारियों को मिलनी है, जिन होटलों के कर्मचारी उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय नियमावली में पंजीकृत होंगे। जनपद में करीब छह सौ होटल संचालित हैं। इनमें से महज 108 होटल ही नियमावली में पंजीकृत हैं। करीब पांच सौ के आसपास होटल बिना पंजीकृत के ही चल रहे हैं। पर्यटन विभाग के नोटिसों के बावजूद भी होटलों का पंजीकरण नहीं कराया। इसका खामियाजा अब बिना पंजीकृत होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को भुगतान पड़ेगा। पंजीकरण नहीं होने से ये कर्मचारी योजना से बाहर रह जाएंगे।
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ऑनलाइन करना होगा आवेदन
होटल कर्मचारियों को आर्थिक सहायता का लाभ दिलाने के लिए होटल स्वामियों को उनका आवेदन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन करना होगा। इसके बाद जिला पर्यटन विकास कार्यालय की ओर से आवेदनों को स्वीकृत करने के बाद कर्मचारियों के बैंक खातों में सीधा पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
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कुलियों-रिक्शा चालकों को भी मिलेगा लाभ
आर्थिक सहायता योजना का लाभ नगर निगम में पंजीकृत रिक्शा चालकों और कुलियों को भी लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार नगर निगम में पंजीकृत रिक्शा चालक और कुली योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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कोरोना संक्रमण काल में पंजीकृत होटलों के कर्मचारियों को ही योजना का लाभ मिल सकेगा। इससे ऐसे होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को काफी राहत मिल सकेगी, लेकिन जिन होटल संचालकों ने आज तक पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें योजना का कोई लाभ नहीं दिया जाएगा।
- सीमा नौटियाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, हरिद्वार